✍️✍️ 10 साल बाद मिला इंसाफ: वर्तमान विधायक व उनके भाई को सभी आरोपों से कोर्ट ने किया बरी, अदालत ने साक्ष्य के अभाव में सुनाया फैसला


चंदौली:

विशेष न्यायालय (एमपी/एमएलए) के न्यायाधीश अशोक कुमार की अदालत ने थाना बलुआ में दर्ज एक गंभीर मामले में विधायक प्रभु नारायण यादव व उनके भाई अनिल यादव को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला करीब 10 वर्षों बाद आया, जब अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है।

👉 मामला वर्ष 2015 का है, जब वादी सुशील सिंह द्वारा आरोप लगाया गया था कि प्रभु नारायण यादव और उनके भाई समेत अन्य समर्थकों ने सड़क जाम कर उन पर हमला किया व आवागमन बाधित कर दिया। विरोध करने पर उनलोगों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। लेकिन सुनवाई के दौरान सभी प्रमुख गवाहों के बयान विरोधाभासी पाए गए और किसी स्वतंत्र या तात्विक साक्षी को अदालत में पेश नहीं किया गया।

👉 अदालत ने पाया कि घटना के समय की परिस्थितियों, प्रकाश की स्थिति, गाड़ियों की पहचान तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में भारी विरोधाभास था। न्यायालय ने यह भी कहा कि मामला द्वेषवश दर्ज कराया गया प्रतीत होता है और तथ्यात्मक रूप से कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया।

👉 इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव "गुड्डू", संदीप कुमार यादव व,संदीप यादव  ने मजबूती से पक्ष रखा, जिसके आधार पर न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।


👉 आदेश में कहा गया:

"अभियोजन पक्ष आरोपित अपराध को युक्तिसंगत संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि टिक नहीं सकती। अतः अपील स्वीकार की जाती है और अभियुक्तगण को दोषमुक्त किया जाता है।"

👉 बता दें कि यह फैसला ना सिर्फ कानून की निष्पक्षता को दर्शाता है, बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि राजनीतिक रंजिश में दर्ज मामलों की गहराई से जांच आवश्यक है अन्यथा निर्दोषों को वर्षों तक न्याय के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।

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