✍️✍️ 5.02 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज


वाराणसी। 

विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने 5.02 करोड़ रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी के गंभीर मामले में आरोपी सूर्य नारायण यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की प्राकृतिक गंभीरता, बहुपक्षीय साजिश और साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए यह निर्णय सुनाया।

""अदालत में वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, संदीप यादव एवं मुकेश सिंह ने जोरदार तरीके से जमानत अर्जी का विरोध किया""


मामले की पृष्ठभूमि:

👉 वादी सत्येन्द्र कुमार श्रीवास्तव, जो मेसर्स निलाम्बर ट्रैक्सिम एण्ड क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजर हैं, ने चेतगंज एसीपी को दी गई लिखित तहरीर में बताया कि उनकी कंपनी 1992 में पश्चिम बंगाल में पंजीकृत है, और उसका हेड ऑफिस वाराणसी के नाटी इमली, ईश्वरगंगी में स्थित है।

👉 उक्त कंपनी के दो बैंक खाते यस बैंक, रामकटोरा शाखा में संचालित होते हैं, जिनका संचालन कंपनी के निदेशक कवलधारी यादव को निदेशक मंडल द्वारा अधिकृत किया गया था।


धोखाधड़ी की विस्तृत योजना:

👉 कवलधारी यादव ने अपने पारिवारिक सदस्यों – पत्नी विद्या देवी, पुत्रगण ब्रह्मदेव और सूर्य नारायण यादव – के साथ मिलकर कई अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं जैसे आशीष तिवारी, मंदीप सिंह, हिमांशु शुक्ला, शादाब राजा, मेसर्स मैक्समोर पेमेंट डिजिटेक प्रा. लि., मेसर्स वैभव ट्रेडर्स, दिव्यांशी ब्यूटीपार्लर, नेहा बानो, दीप कलेक्शन, मो. आमिर और उमंग गौतम की मदद से कंपनी के बैंक खातों से 5.02 करोड़ रुपये निकाल लिए।

👉 इतना ही नहीं, इस धोखाधड़ी में यस बैंक के तत्कालीन प्रबंधक और कर्मचारियों की संलिप्तता का भी आरोप है, जिन्होंने मिलीभगत कर अवैध रूप से धन का ट्रांसफर किया।


पुलिसिया कार्रवाई और गिरफ्तारी:

👉 मामले में वाराणसी पुलिस ने जांच कर संबंधित सभी आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की। सूर्य नारायण यादव को गिरफ्तारी के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।


अदालत का निष्कर्ष:

👉 विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया मामला अत्यंत संगीन आर्थिक अपराध का है, जिसमें अनेकों व्यक्तियों की मिलीभगत, बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग और विश्वासघात की आशंका स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इस प्रकार की आर्थिक धोखाधड़ी समाज के वित्तीय तंत्र को गहरा नुकसान पहुंचाती है। अतः सूर्य नारायण यादव की जमानत याचिका खारिज की जाती है।

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