रामनगर थाना क्षेत्र में दर्ज एक गंभीर आपराधिक मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) के न्यायाधीश नितिन पांडेय की अदालत ने अभियुक्त तौहीद अंसारी की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत ने सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और तर्कों को विचाराधीन रखते हुए अभियुक्त को ₹50,000 के निजी मुचलके और दो जमानतदारों के साथ सशर्त रिहाई का आदेश दिया।
👉बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता विश्वास सिंह, दीपक पाल एवं अमित अग्रवाल ने अदालत में दलील दी कि अभियुक्त को झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। उनका कहना था कि वादिनी और अभियुक्त पहले से परिचित थे और वादिनी एकतरफा प्रेम में निकाह का दबाव बना रही थी, जिससे इनकार करने पर झूठे आरोप गढ़े गए। उन्होंने बताया कि प्राथमिकी में किसी घटना का स्पष्ट दिनांक व समय नहीं है और न ही कोई चिकित्सकीय प्रमाण है।
👉 वहीं, अभियोजन पक्ष एवं वादिनी की ओर से जमानत याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया गया कि अभियुक्त ने पीड़िता को बार-बार परेशान किया, ब्लैकमेल किया, वीडियो वायरल करने की धमकी दी और रास्ते में रोककर अश्लील प्रस्ताव रखा। पीड़िता की शिकायत के आधार पर रामनगर थाना में मु.अ.सं. 142/2025 अंतर्गत धारा 308(2), 351(2), 75 भारतीय न्याय संहिता व धारा 7/8 पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया।
👉 अदालत ने केस डायरी, एफआईआर, पीड़िता के बयान एवं अन्य तथ्यों का अवलोकन करते हुए पाया कि अभियुक्त पूर्व से पीड़िता का परिचित था और फिलहाल पीड़िता उससे कोई संपर्क नहीं रखना चाहती। मामले में अंतिम रिपोर्ट या वीडियो साक्ष्य अभी उपलब्ध नहीं हैं। अभियुक्त के खिलाफ अन्य तीन मुकदमे भी दर्ज हैं, परंतु दोषसिद्धि का कोई प्रमाण नहीं मिला।
👉 उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अभियुक्त को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। शर्तों में यह शामिल है कि अभियुक्त न्यायालय द्वारा निर्धारित किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं करेगा और विवेचना में सहयोग देगा।
