""रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी मामला: एमपी-एमएलए कोर्ट ने एफआईआर दर्ज कर जांच के दिए आदेश""
""स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ वादी की याचिका पर कोर्ट ने माना प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध, थाना कैंट को विधिक कार्यवाही के निर्देश""
वाराणसी।
रामचरितमानस पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर पूर्व मंत्री व सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ अब कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। एमपी-एमएलए कोर्ट वाराणसी के न्यायाधीश नीरज कुमार त्रिपाठी ने वादी द्वारा दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए थाना कैंट को निर्देश दिया है कि वे संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित करें।
👉 वादी ने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता नदीम अहमद खान, विवेक कुमार व मनोज कुमार के माध्यम से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। याचिका में कहा गया कि दिनांक 22 जनवरी 2023 को एक टीवी इंटरव्यू के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस ग्रंथ को लेकर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी की थी, जिसे कई टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में व्यापक रूप से प्रसारित किया गया।
👉 वादी के अनुसार, ये टिप्पणियां न केवल उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली थीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ भी खिलवाड़ था। उन्होंने बताया कि पूर्व में उन्होंने पुलिस आयुक्त को भी लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
👉 गौरतलब है कि इस मामले में पहले दाखिल याचिका को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दिया था, लेकिन उसके विरुद्ध दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर पुनरीक्षण न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 156(3) के अंतर्गत जांच के निर्देश देने के लिए धारा 196 के तहत राज्य या केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक नहीं है।
👉 कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया विपक्षी के विरुद्ध संज्ञेय अपराध बनता है और मामले में साक्ष्य संकलन पुलिस द्वारा ही किया जाना उपयुक्त होगा। इस आधार पर कोर्ट ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए एफआईआर दर्ज करने और विवेचना करने का आदेश दिया।
