✍️✍️ कचहरी में वकील-पुलिस टकराव: आखिर माहौल बिगाड़ने वाला कौन?


दरोगा की पिटाई से शुरू हुआ विवाद, क्या महिला पुलिस अधिकारी की टिप्पणी या बयानबाज़ी से दोबारा हुआ तनाव?

वाराणसी।

बीते दिनों दीवानी कचहरी परिसर में एक बड़ी घटना सामने आई, जब काली कोट पहने कुछ लोगों ने बड़ागांव थाने के एक दरोगा की पिटाई कर दी। बीच-बचाव में आए कुछ अधिवक्ताओं की भी उन लोगों से झड़प हो गई। घायल दरोगा को कुछ अधिवक्ताओं की मदद से पुलिस बाहर ले जाकर अस्पताल भेजा। घटना के बाद गेट नंबर दो के बाहर पुलिस बल तैनात हो गया, लेकिन बार के पदाधिकारियों की सूझबूझ से उसी दिन मामला शांत रहा।


अगले दिन माहौल सामान्य, लेकिन फिर भड़की चिंगारी

👉 बुधवार को अधिवक्ता रोज़ की तरह काम पर लौट आए और दिन भर वातावरण सामान्य रहा। 

👉 गुरुवार की सुबह भी अधिवक्ता अपने-अपने कार्य में जुटे थे। इसी बीच घायल दरोगा के परिजन सीपी कार्यालय के सामने पत्नी, पिता, भाई, बच्चे और अन्य महिलाओं के साथ धरने पर बैठ गए। अधिवक्ताओं ने इसे नज़रअंदाज़ कर अपनी दिनचर्या जारी रखी, लेकिन अचानक पुलिस बल की संख्या बढ़ने लगी।

👉 नीतू कात्यायन महिला पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचीं। अधिवक्ताओं द्वारा बताया गया कि फोर्स की तैनाती और उनके व्यवहार से यह आशंका होने लगी कि मानो किसी टकराव की तैयारी पहले से थी।


अभद्र टिप्पणी और हूटिंग से बढ़ा तनाव

👉 दावा किया जा रहा है कि नीतू कात्यायन महिला पुलिस अधिकारी ने एक वकील के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय में दुर्व्यवहार और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए हूटिंग किया, विरोध करने पर तीखी टिप्पणियां की गईं, जो अपने मुवक्किल के साथ वहां पहुंचा था। इस बात की जानकारी अन्य अधिवक्ताओं में पहुंचते ही कचहरी परिसर में उबाल आ गया और वकीलों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते वकील-पुलिस फिर आमने-सामने हो गए।


सोशल मीडिया पर वीडियो और आरोप

👉 सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें नीतू कात्यायन महिला पुलिस अधिकारी और कैंट थाने में तैनात शिवाकांत मिश्रा की कथित टिप्पणियों पर सवाल उठ रहे हैं। जिस तरह से वीडियो में अभद्र भाषा का हवाला दिया जा रहा है, वही शिवाकांत मिश्रा लड़ाई के लिए ललकारा हुए नजर आ रहे। अधिवक्ताओं का आरोप है कि मिश्रा ने पूर्व के मामलों में पैरवी से खिन्न होकर बिना कारण कुछ अधिवक्ताओं का नाम शामिल किया है।


अधिवक्ताओं की नाराज़गी

👉 कई अधिवक्ताओं का कहना है कि जब मामला शांत हो चुका था और पुलिस जांच कर रही थी, तो नीतू कात्यायन महिला पुलिस अधिकारी बार-बार एग्रेसिव होकर माहौल बिगाड़ने का काम कर रही है। उनका रवैया काशी विश्वनाथ की नगरी में अमन-चैन के खिलाफ है। 


पुलिस के व्यवहार पर सवाल

👉 अधिवक्ताओं का कहना है कि वर्तमान समय में वाराणसी के कुछ पुलिसकर्मी जिस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो जनता से भी सीधी टकराव की स्थिति बन सकती है। पब्लिक सर्वेंट को जनता और अधिवक्ताओं दोनों के साथ संतुलन बनाना चाहिए।

👉 बता दें कि कचहरी में हुए घटनाक्रम ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि मामला शांत होने के बाद आग में घी किसने डाली? अधिवक्ता हों या पुलिस—किसी भी समाज के कुछ लोगों की गलतियों का खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। अब देखना होगा कि इस विवाद को सुलझाने और विश्वास बहाली की दिशा में दोनों पक्ष कौन-से कदम उठाते हैं।

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