✍️✍️ स्कूल प्रबंधन पर मुकदमा दर्ज करने की मांग, कोर्ट ने दिया जिला विद्यालय निरीक्षक को जांच का आदेश

 

वाराणसी: 

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार द्वितीय की अदालत ने थाना सिगरा में दर्ज एक मुकदमे से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। यह आदेश एक पीड़िता द्वारा 8 सितंबर, 2025 को दायर किए गए प्रार्थना पत्र के बाद आया है, जिसमें उसने स्कूल के डीन, प्रिंसिपल और अन्य अधिकारियों पर धमकाने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। अदालत ने जिला विद्यालय निरीक्षक, वाराणसी को निर्देश दिया है कि वह प्रार्थना पत्र में बताए गए तथ्यों की जांच करें और तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करें। 

""पीड़िता की ओर से फौजदारी अधिवक्ता जयदीप चक्रवर्ती ने अदालत में प्रभावी पैरवी की""


मामला क्या है?

👉 पीड़िता ने अपनी अर्जी में कहा है कि उसने 28 मई, 2025 को सिगरा थाने में एक मुकदमा (मु.अ.सं. 180/2025, धारा-296, 352 बीएनएस) दर्ज कराया था। इस मामले में डीन और प्रिंसिपल को आरोपी बनाया गया था।

पीड़िता के अनुसार, आरोपी अब उस पर और उसकी गवाह पर सुलह करने का दबाव बना रहे हैं। आरोप है कि सुलह का दबाव बनाने के लिए गवाह को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। पिछले दो महीनों में, गवाह का तीन बार तबादला किया गया और वर्तमान में उसे उसी शाखा में भेज दिया गया है, जहां आरोपी डीन कार्यरत हैं।

जब पीड़िता और गवाह ने इस बारे में स्कूल के प्रेसिडेंट और एडिशनल डायरेक्टर से बात की, तो उन्होंने भी उन पर सुलह का दबाव बनाया।


बच्चों को भी बनाया निशाना

👉 प्रार्थना पत्र में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जब सुलह के लिए मना कर दिया गया, तो आरोपियों ने गवाह के दो बच्चों को भी प्रताड़ित करना शुरू कर दिया, जो उसी स्कूल में पढ़ते हैं।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि 1 सितंबर, 2025 को गवाह की नाबालिग बेटी को किसी अज्ञात व्यक्ति के जरिए धमकी दी गई कि, "तुम्हारी मम्मी से कह देना कि जो डीन सर मांग रहे हैं, उन्हें दे दें, अन्यथा तुम्हारे साथ भी वही होगा जो तुम्हारी मम्मी की साथी के साथ हुआ है।" इस घटना के बाद बच्ची इतनी डर गई कि वह दो दिनों तक स्कूल नहीं जा पाई और उसे डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। उसी दिन बच्ची को उसकी कक्षा के व्हाट्सएप समूह से भी निकाल दिया गया, ताकि उसे स्कूल की गतिविधियों की जानकारी न मिल सके।


पुलिस पर भी कार्रवाई न करने का आरोप

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि उसने इस पूरे मामले की जानकारी मुकदमा की जांच कर रही अधिकारी कुसुम जायसवाल को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने थाना सिगरा के प्रभारी निरीक्षक और पुलिस आयुक्त वाराणसी से भी संपर्क किया, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई।

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