✍️✍️ बार एसोसिएशन चुनावों पर लगी रोक हटी, हाईकोर्ट ने कहा—राज्य बार काउंसिल के पास नहीं था अधिकार


इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की सभी ज़िला बार एसोसिएशनों के चुनावों पर लगी अस्थायी रोक हटाते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य बार काउंसिल के पास बार एसोसिएशन चुनावों को रोकने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनिश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

राज्य बार काउंसिल ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्देश के आधार पर 15 नवंबर 2025 से फरवरी 2026 तक चुनाव न कराने का आदेश जारी किया था। यह रोक इसलिए लगाई गई थी ताकि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव और जिला बार एसोसिएशन के चुनाव एक साथ न हों।

मामलों का विवरण

  • यह आदेश तीन अलग-अलग रिट याचिकाओं पर सुनवाई के बाद पारित किया गया—
  • 👉 रिट-सी नं. 40685/2025: मोहम्मद आरिफ सिद्दीकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य
  • 👉 रिट-सी नं. 40108/2025: राम नंद श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य
  • 👉रिट-सी नं. 37943/2025: जितेंद्र सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि BCI और राज्य बार काउंसिल द्वारा चुनाव रोकने का आदेश अवैध है, क्योंकि जिला बार एसोसिएशन अपने स्वयं के उपनियमों से संचालित होते हैं।


न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

  • BCI का अधिकार सीमित: कोर्ट ने माना कि BCI को एडवोकेट्स एक्ट की धारा 7(g) और 48-B के तहत राज्य बार काउंसिल को पत्र लिखने का अधिकार है, परंतु जिला बार एसोसिएशनों के चुनाव को रोकने का अधिकार नहीं।
  • राज्य बार काउंसिल का आदेश अवैध: अदालत ने कहा कि राज्य बार काउंसिल के पास किसी भी एसोसिएशन को चुनाव रुकवाने की कोई वैधानिक शक्ति नहीं है।
  • उपनियम सर्वोपरि: बार एसोसिएशन के चुनाव उनके अपने बाय-लॉज़ के अनुसार ही कराए जाएंगे।
  • सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला अप्रासंगिक: अदालत को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित एम. वर्धन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामला जिला बार चुनावों से संबंधित नहीं है। अतः चुनाव रोकने का औचित्य नहीं बनता।


अंतिम आदेश

उच्च न्यायालय ने सभी याचिकाओं का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया—

  • जिला बार एसोसिएशंस अपने उपनियमों के अनुसार चुनाव कराएँ।
  • चुनाव अधिसूचना जारी करते समय यह सुनिश्चित करें कि बार काउंसिल ऑफ यूपी के चुनाव कार्यक्रम से कम से कम 10 दिन का अंतर रहे।
  • दोनों चुनावी प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से न टकराएँ।


पक्षकारों की उपस्थिति

याचिकाकर्ताओं की ओर से: बैरिस्टर सिंह, अनुपम दुबे, वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय

प्रतिवादी की ओर से: अशोक कुमार तिवारी, साईं गिरधर, कृतिका सिंह, प्रियंका मिढ़ा (ए.सी.एस.सी.), मनोज कुमार मिश्रा (सी.एस.सी.)

उच्च न्यायालय का यह आदेश राज्यभर की बार एसोसिएशनों के लिए राहत लेकर आया है और अब वे अपने उपनियमों के अनुसार स्वतंत्र रूप से चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेंगी।

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