✍️✍️ नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में चार अभियुक्तों को अदालत ने सुनाई कठोर सजा

 

वाराणसी।

 स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (यूपीएसईबी) वाराणसी के न्यायाधीश श्री विनोद कुमार की अदालत ने नाबालिग लड़की का अपहरण कर लंबे समय तक कब्जे में रखने के 20 वर्ष पुराने मामले में चार अभियुक्तों—शाहनवाज, बाबू उर्फ़ फिरोज, मंजू उर्फ़ मन्नू और बेबी—को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है।

""अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) रोहित मौर्य, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी गंगा शरण (सीआईडी) वाराणसी तथा अधिवक्ता सुधांशु गुप्ता ने की""


मामले का विवरण

वादी मोहम्मद इब्राहिम ने 26 नवंबर 2005 को थाना आदमपुर में अपनी नाबालिग पुत्री के अपहरण की तहरीर दी। आरोप था कि अभियुक्त शाहनवाज, मंजू उर्फ मन्नू और बाबू उर्फ फिरोज उसकी बेटी का अपहरण कर ले गए, लेकिन पुलिस की ओर से कार्रवाई न होने पर उसने 29 नवंबर 2005 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाराणसी को प्रार्थना पत्र दिया। आदेश के बाद मुकदमा पंजीकृत हुआ और विवेचना प्रारंभ की गई, जिसे बाद में सीबीसीआईडी को स्थानांतरित किया गया।

विवेचना के दौरान पीड़िता को मुलजिमा बेबी के घर से बरामद किया गया। उसका मेडिकल परीक्षण एवं धारा 164 दं.प्र.सं. के तहत बयान दर्ज कराया गया। जांच के उपरांत चारों अभियुक्तों के खिलाफ धारा 363, 366 एवं 368 आईपीसी में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से कुल 10 गवाह प्रस्तुत किए गए।


सजा का निर्णय

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 5 दिसंबर 2025 को सभी अभियुक्तों को दोषी करार दिया और आज दिनांक 9 दिसंबर 2025 को सजा का ऐलान किया।

👉धारा 363 आईपीसी में अभियुक्त शाहनवाज, बाबू उर्फ फिरोज और मंजू उर्फ मन्नू को 7 वर्ष की सजा एवं 10,000 रुपये जुर्माना।

👉धारा 366 व 368 आईपीसी में चारों अभियुक्त—शाहनवाज, बाबू उर्फ फिरोज, मंजू उर्फ मन्नू और बेबी—को 10 वर्ष की सजा तथा 10,000 रुपये प्रत्येक पर जुर्माना।

👉कुल 1,10,000 रुपये में से 80 प्रतिशत (₹88,000) राशि पीड़िता को देने का आदेश भी दिया गया है।


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