✍️✍️अनाया प्रकरण : अस्पताल में लापरवाही से बच्ची की मौत का मामला: कोर्ट ने FIR दर्ज करने का दिया आदेश

 


वाराणसी:

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने सात वर्षीय बच्ची अनाया रिजवान की कथित चिकित्सकीय लापरवाही से हुई मौत के मामले में थाना भेलूपुर को तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना शुरू करने का आदेश दिया है।

यह आदेश आफरीन रिजवान द्वारा डॉ. प्रत्युष रंजन और अन्य के विरुद्ध दायर प्रार्थना-पत्र (प्रकीर्ण प्रार्थना-पत्र सं. 4029/2025) पर आया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (B.N.S.S.) की धारा 173(4) के तहत मुकदमा दर्ज करने और जांच की मांग की गई थी।

बता दे की पीड़िता पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी, राजेश त्रिवेदी, आशुतोष शुक्ला, राजकुमार तिवारी, मणिंद्र मिश्रा,आशुतोष सक्सेना व दीपक वर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए घटना और माननीय न्यायालय के कार्यवाही के बारे में अवगत कराया।


क्या है मामला?

 👉घटना: वादिनी आफरीन रिजवान की सात वर्षीय पुत्री अनाया रिजवान को 14 अक्टूबर 2025 को रेटिना सर्जरी के लिए ASG Eye Hospital, वाराणसी में भर्ती कराया गया था।

 👉 आरोप: सर्जरी शुरू होने के बाद बच्ची की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ी और उसे कई अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया, जिसके बाद Matcare Hospital में उसे मृत घोषित कर दिया गया।

 👉 लापरवाही के आरोप: प्रार्थना-पत्र में बच्ची की मृत्यु का कारण ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया की खुराक, मॉनिटरिंग और तत्काल आपातकालीन प्रबंधन में गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही को बताया गया है।

 👉 प्रशासनिक निष्क्रियता: वादिनी द्वारा सक्षम पुलिस अधिकारियों को कई आवेदन और लीगल नोटिस दिए जाने के बावजूद, अब तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई थी।


कोर्ट में पेश किए गए साक्ष्य और आरोप

प्रार्थिनी ने अपनी अर्जी में डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर साक्ष्य नष्ट करने और जांच में बाधा डालने का भी गंभीर आरोप लगाया है।

 👉 साक्ष्य छिपाना: ASG Eye Hospital और Matcare Hospital ने वादिनी के अधिवक्ता द्वारा जारी औपचारिक नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया और न ही चिकित्सा रिकॉर्ड, एनेस्थीसिया चार्ट या CCTV फुटेज उपलब्ध कराए।

 👉 डॉ. प्रत्युष रंजन के विरोधाभासी बयान: प्रार्थना-पत्र में उल्लेख किया गया कि डॉ. प्रत्युष रंजन ने पहले CCTV न होने की बात कही, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि सर्जरी माइक्रोस्कोप के माध्यम से रिकॉर्ड होती है। उन्होंने फुटेज देने का वादा करके बाद में "क्लाउड सुरक्षा" और "नियमों" का हवाला देकर इनकार कर दिया।

 👉 आरोपित धाराएं: वादिनी ने अभियुक्तों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) (उपेक्षापूर्ण कार्य से मृत्यु कारित करना), धारा 125 (लापरवाही से मानव जीवन को संकट में डालना), धारा 231 (साक्ष्य छिपाना या नष्ट करना), और धारा 61 (आपराधिक षडयंत्र) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।


 न्यायालय का आदेश

थाना भेलूपुर द्वारा दिए गए आख्या में यह स्पष्ट किया गया था कि इस प्रकरण में कोई अभियोग पंजीकृत नहीं है।

न्यायालय ने मामले के अवलोकन से यह निष्कर्ष निकाला कि वादिनी द्वारा लगाए गए आरोपों से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध कारित किया जाना प्रतीत हो रहा है, और विवेचना कराये जाने का पर्याप्त आधार है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मनीष कुमार ने 06.12.2025 को प्रार्थना-पत्र को स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष, भेलूपुर को निम्नलिखित आदेश दिए:

 👉 तत्काल FIR दर्ज करें: प्रार्थना-पत्र में वर्णित घटना के संबंध में समुचित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाए।

 👉 विवेचना सुनिश्चित करें: दर्ज FIR के आधार पर निष्पक्ष विवेचना कराई जाए।

वादिनी ने अदालत से जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को एक स्वतंत्र उच्च-स्तरीय मेडिकल बोर्ड गठित कर चिकित्सा लापरवाही की जांच करने तथा सभी साक्ष्य जब्त कर न्यायालय की अभिरक्षा में रखने का भी अनुरोध किया है।

बता दे की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी के द्वारा बताया गया कि न्यायालय के आदेश के पूर्व उक्त प्रकरण की जांच पीड़िता के अधिवक्ता द्वारा प्रार्थना पत्र जिलाधिकारी वाराणसी को दी गई थी, जिस पर जिलाधिकारी वाराणसी द्वारा मेडिकल बोर्ड भी पूर्व में गठित की जा चुकी थी, जिस पर मेडिकल बोर्ड जांच समिति की रिपोर्ट भी जांचोपरांत आना बाकी है।

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