✍️✍️ ऑपरेशन के दौरान लापरवाही से ITBP जवान की मौत, कोर्ट के आदेश पर अस्पताल और डॉक्टरों के खिलाफ FIR के निर्देश
जिले की एक अदालत ने चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी लापरवाही बरतने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार सिंह ने चितईपुर स्थित एपेक्स हॉस्पिटल के प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला भारतीय तिब्बत सीमा बल (ITBP) के एक जवान की इलाज के दौरान हुई संदिग्ध मौत से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
मामला अप्रैल-मई 2025 का है। आजमगढ़ निवासी सुजीत कुमार सिंह, जो ITBP में कार्यरत थे, उन्हें गाल ब्लैडर (पित्त की थैली) में स्टोन के ऑपरेशन के लिए चितईपुर स्थित एपेक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 23 अप्रैल 2025 को डॉ. अनुराग दीक्षित द्वारा उनका ऑपरेशन किया गया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद से ही सुजीत की हालत बिगड़ती गई, लेकिन डॉक्टरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
मेडिकल बोर्ड की जांच में बड़ा खुलासा
न्यायालय के आदेश पर गठित मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- नसों का कटना: ऑपरेशन के दौरान 'सिस्टिक आर्टरी' (Cystic Artery) क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे पेट के भीतर भारी मात्रा में खून जम गया और संक्रमण फैल गया।
- अंगों का फेल होना: अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज के लीवर और किडनी ने काम करना बंद कर दिया था।
- जांच में कोताही: जब मरीज दर्द की शिकायत लेकर दोबारा अस्पताल पहुंचा, तो डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन जैसी जरूरी जांचें नहीं कीं, जिससे अंदरूनी रक्तस्राव का पता नहीं चल सका।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
अदालत ने पाया कि अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ की रिपोर्ट और वाराणसी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड की आख्या से स्पष्ट है कि मरीज के उपचार में घोर लापरवाही बरती गई। कोर्ट ने इसे 'संज्ञेय अपराध' मानते हुए थाना प्रभारी चितईपुर को आदेश दिया कि वे एपेक्स हॉस्पिटल के प्रबंधक डॉ. संतोष सिंह, डॉ. अनुराग दीक्षित और अन्य संबंधित स्टाफ के खिलाफ धारा 173(4) BNSS के तहत मुकदमा पंजीकृत कर अविलंब विवेचना शुरू करें।
पीड़ित परिवार का आरोप: दी गई जान से मारने की धमकी
मृतक के भाई अमित कुमार सिंह ने शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को बताया कि जब उन्होंने अस्पताल में इलाज के बारे में सवाल किए, तो उनके साथ अभद्रता की गई। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी थी। मृतक अपने पीछे दो साल की बेटी, पत्नी और बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ गए हैं, जिनका वे एकमात्र सहारा थे।

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