✍️✍️ गंगा में इफ्तार और चिकन बिरयानी पार्टी मामला: वाराणसी कोर्ट ने सभी 14 अभियुक्तों की जमानत याचिका की खारिज
""अभियोजन पक्ष (वादी के अधिवक्ता) की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी व आशुतोष शुक्ला ने जमानत प्रार्थना पत्र का घोर विरोध किया""
क्या है पूरा मामला?
यह घटना मार्च 2026 की है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। आरोप है कि अभियुक्तों ने जानबूझकर सनातन धर्म की आस्था के केंद्र, 'माँ गंगा' की गोद में नाव पर बैठकर मांसाहारी भोजन (चिकन बिरयानी) किया और उसके अवशेषों को पवित्र नदी में ही फेंक दिया। इस कृत्य से जनमानस में भारी आक्रोश फैल गया था।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल की तहरीर पर कोतवाली थाने में एफआईआर (मु०अ०सं० 65/2026) दर्ज की गई थी। अभियुक्तों को 17 मार्च को 'गाय घाट' के पास से गिरफ्तार किया गया था।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीश ने कई गंभीर बिंदुओं पर ध्यान दिया। कोर्ट ने माना कि गंगा नदी करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। वहां इस तरह का कृत्य न केवल निंदनीय है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाला भी है। अदालत ने कहा कि वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करना यह दर्शाता है कि इसका उद्देश्य सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ना था। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि त्योहारों के समय इस तरह की घटना करना अपराध की गंभीरता को और बढ़ा देता है। इसे केवल एक सामान्य कृत्य नहीं माना जा सकता।
बचाव और अभियोजन पक्ष के तर्क
अभियुक्तों के वकील ने तर्क दिया कि उन्हें राजनीतिक द्वेष के कारण फंसाया गया है और वीडियो की प्रामाणिकता संदिग्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो में कहीं भी हड्डियां गिरते हुए नहीं दिख रही हैं।
जबकि अभियोजन ने पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि चश्मदीद गवाहों (नाविकों) के बयानों से स्पष्ट है कि नाव पर चिकन बिरयानी का उपयोग हुआ था। गवाहों और वादी को धमकियां भी दी जा रही हैं, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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