वाराणसी। स्थानीय अदालत ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत आरोपित पांच महिला शराब लाइसेंसियों को बड़ी राहत दी है। अपर सत्र न्यायाधीश (द्रुतगामी) मनोज कुमार की अदालत ने मंगलवार को रेखा देवी, बबिता सिंह, ऊषा देवी, शिवांगी जायसवाल और राधिका जायसवाल की न्यायिक अभिरक्षा की मांग को खारिज करते हुए उन्हें एक-एक लाख रुपये के व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
""अदालत में आरोपी ऊषा देवी की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता , अवधेश सिंह ,राममूरत सोनकर व आशीष यादव ने पक्ष रखा""
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, इन महिलाओं पर आरोप था कि इन्होंने कोडिनयुक्त कफ सिरप की तस्करी से अर्जित अवैध धन का उपयोग कर शराब की दुकानों के लाइसेंस प्राप्त किए। साथ ही, इन पर मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल और उसकी पत्नी वैशाली पुर्सवानी को दुबई में शरण (संश्रय) लेने के लिए हवाला के माध्यम से आर्थिक मदद पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि इनके खातों में लाखों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है।
बता दे कि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि केस डायरी में ऐसे पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं जो सीधे तौर पर इन महिलाओं की संलिप्तता साबित कर सकें। कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां इस प्रकार रहीं:
- दस्तावेजी साक्ष्य का अभाव: केस डायरी में ऐसा कोई विवरण नहीं मिला जिससे स्पष्ट हो कि इन महिलाओं ने अपने बैंक खातों से कितनी रकम फरार आरोपियों को ट्रांसफर की।
- कोई बरामदगी नहीं: अभियुक्तों के पास से न तो कोई नकद बरामद हुआ और न ही एनडीपीएस एक्ट से संबंधित कोई अवैध वस्तु मिली।
- लाइसेंस की वैधता: आरोपियों की शराब दुकानों के लाइसेंस निरस्त किए जाने का भी कोई साक्ष्य पुलिस प्रस्तुत नहीं कर सकी।
- मानवीय पक्ष: अभियुक्त ऊषा देवी ने अपनी गंभीर बीमारी (किडनी स्टोन) और राधिका जायसवाल व शिवांगी जायसवाल (जिसके साथ तीन साल की बच्ची थी) के पक्ष को भी कोर्ट के समक्ष रखा।
कड़ी शर्तों के साथ रिहाई
अदालत ने रिमांड अर्जी निरस्त करते हुए अभियुक्तों को कड़ी शर्तों के साथ रिहा कर दिया।

