✍️✍️ ""Legal Recognition Granted to Elderly Landlord’s Need; Tenant’s Appeal Rejected""


✍️✍️ “वृद्ध मकान मालिक की जरूरत को मिली कानूनी मान्यता, किराएदार की अपील खारिज”

वाराणसी। शहर के चेतगंज वार्ड स्थित सेनपुरा मोहल्ले में किराएदारी विवाद के एक अहम मामले में न्यायालय ने मकान मालिक के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर जिला न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-14/किराया अधिकरण, वाराणसी ने रेन्ट अपील संख्या-84/2025 बटुक सिंह बनाम संतोष कुमार सिंह व अन्य को निरस्त करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है।

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वाद संख्या 875/2023 संतोष कुमार व अन्य बनाम बटुक सिंह में विद्वान किराया प्राधिकारी द्वारा 10 जनवरी 2025 को पारित निर्णय पूरी तरह से सही और न्यायोचित है। साथ ही आदेश की प्रति मूल पत्रावली सहित आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित प्राधिकारी को भेजने का निर्देश दिया गया है।

"" अदालत में मकान मालिक की ओर से संत सरन सेठ (अधिवक्ता) व तेज प्रकाश श्रीवास्तव (अधिवक्ता) ने पक्ष रखा""

क्या है मामला?

मकान मालिक संतोष कुमार एवं ईश्वर चन्द्र ने अपने मकान (भवन संख्या C-7/203) के एक हिस्से में रह रहे किराएदार बटुक सिंह के खिलाफ बेदखली की याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि परिवार बढ़ने और खुद की वृद्धावस्था व शारीरिक असमर्थता (एक पैर खराब) के कारण उन्हें भूतल पर स्थित कमरे और किचन की अत्यंत आवश्यकता है।

वहीं, किराएदार बटुक सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि मकान मालिक के पास पर्याप्त जगह है और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि वह नियमित रूप से ₹300 प्रतिमाह किराया दे रहे हैं और कोई बकाया नहीं है।


 अदालत का निर्णय

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि मकान मालिक की आवश्यकता वास्तविक (Genuine) और सद्भावपूर्ण है। अदालत ने कहा कि वृद्धावस्था, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और परिवार के विस्तार को देखते हुए मकान मालिक को अपने ही घर के हिस्से की जरूरत होना पूरी तरह न्यायसंगत है। इसी आधार पर न्यायालय ने किराएदार की अपील खारिज करते हुए बेदखली के आदेश को बरकरार रखा।

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