वाराणसी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मनीष कुमार-II की अदालत ने डिस्ट्रीब्यूटरशिप के नाम पर धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने थाना सिगरा को निर्देशित किया है कि VLCC कंपनी के मालिकों, मैनेजर शरद त्यागी और अन्य सहयोगियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की गहन विवेचना सुनिश्चित करें।
पीड़ित ने अपने ""विद्वान अधिवक्ता उन्मेश श्रीवास्तव, आकाश जयपुरिया, तेज प्रकाश श्रीवास्तव व संत सरन सेठ"" के जरिए धारा 173 (4) बी.एन.एस.एस. के तहत माननीय न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।
क्या है पूरा मामला?
वाराणसी के दास नगर कालोनी, सिगरा निवासी सौरभ पाण्डया ने न्यायालय में धारा 173 (4) बी.एन.एस.एस. के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। पीड़ित का आरोप है कि मार्च 2023 में कंपनी के एजेंटों ने उन्हें आकर्षक ऑफर देकर VLCC की डिस्ट्रीब्यूटरशिप लेने के लिए राजी किया। इसके लिए उनसे सुरक्षा (सिक्योरिटी) के तौर पर चेक लिए गए।
👉 प्रार्थी का कहना है कि कंपनी ने अनुबंध के अनुसार स्टॉक बेचने के लिए स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया, जिससे भारी मात्रा में सामान डंप हो गया। जब पीड़ित ने स्टॉक वापस लेने और व्यापार बंद करने की बात कही, तो कंपनी ने साजिश के तहत उनके दिए गए चेक को बाउंस करवा दिया। विरोध करने पर आरोपियों द्वारा गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी भी दी गई।
👉 पीड़ित ने इस संबंध में स्थानीय थाने और पुलिस आयुक्त से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इसे संज्ञेय अपराध माना और पुलिस को तुरंत मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया।
