वाराणसी।
स्थानीय अदालत ने रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने के करीब 18 साल पुराने एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय प्रताप की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त अंशुल खण्डेलवाल और मनोज मिश्रा को दोषमुक्त कर दिया है।
"" अदालत में अभियुक्त अंशुल खण्डेलवाल की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता रमेश यादव व सहयोगी अधिवक्ता रजत यादव एवं नवीन यादव ने पक्ष रखा""
क्या था मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला साल 2008 का है। वादी मुकदमा अमित कुमार लोहिया, जिनकी मदनपुरा में साड़ी की दुकान है, ने आरोप लगाया था कि 26 दिसंबर 2008 को अंशुल खण्डेलवाल और मनोज मिश्रा उनकी दुकान पर आए और दो लाख पचास हजार की रंगदारी मांगी। आरोप था कि मोबाइल फोन के जरिए भी धमकी दी गई और पैसे न देने पर जान से मारने की बात कही गई। इस संबंध में थाना दशाश्वमेध में आईपीसी की धारा 386 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
न्यायालय का आदेश
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपों को "संदेह से परे" साबित करने में विफल रहा।
👉 अदालत ने पाया कि पत्रावली पर मौजूद साक्ष्य इतने कमजोर हैं कि उनके आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय प्रताप ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी "संदेहस्पद" प्रतीत होती है। परिणामस्वरुप, दोनों अभियुक्तों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया और उनके जमानत बंधपत्र निरस्त कर दिए गए।
