वाराणसी।
जनपद के थाना बड़ागाँव क्षेत्र के अंतर्गत वर्ष 2022 के एक विवादित मामले में आरोपी रोहित पटेल को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट), नितिन पाण्डेय की अदालत ने आरोपी के अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए उसे सशर्त रिहा करने का आदेश दिया है।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता शशिकांत दुबे व सहयोगी अधिवक्ता आलोक सौरभ पाण्डेय, अंकित दुबे एवं विकास सिंह ने पक्ष रखा""
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, ग्राम प्रधान राजकुमार पटेल और उनके भतीजे रोहित पटेल सहित अन्य पर आरोप था कि उन्होंने वादी के घर में घुसकर मारपीट की और उसकी बहन के साथ छेड़खानी की। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर पंजीकृत कर न्यायालय में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
बचाव पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मामला पूरी तरह से चुनावी रंजिश के कारण फर्जी तरीके से दर्ज कराया गया है। घटना से पहले आरोपी के चाचा (वर्तमान प्रधान) ने विपक्षी दल के खिलाफ चोरी और मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसके बदले में यह मनगढ़ंत कहानी रची गई। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि पीड़िता ने धारा 164 दं.प्र.सं. के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में स्पष्ट कहा कि रोहित ने उसके साथ कोई छेड़खानी नहीं की थी, केवल रास्ता रोका था।
न्यायालय का निर्णय
अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि मामले की चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अब किसी 'कस्टोडियल इंट्रोगेशन' (हिरासत में पूछताछ) की आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने यह भी संज्ञान लिया कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है और अन्य सह-आरोपियों की जमानत पहले ही मंजूर हो चुकी है। न्यायाधीश ने 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि के प्रतिभू (जमानतदार) पर अग्रिम जमानत मंजूर की।
