वाराणसी
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ कथित तौर पर भ्रामक और मानहानिकारक पोस्ट साझा करने के मामले में सामाजिक कार्यकर्ता मधु पूर्णिमा किश्वर कानूनी घेरे में आ गई हैं। वाराणसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने अधिवक्ता शशांक शेखर की अर्जी पर संज्ञान लेते हुए कैंट थाने से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने मामले को 'प्रकीर्ण वाद' के रूप में दर्ज कर पुलिस को 15 अप्रैल तक आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी व आशुतोष शुक्ला का आरोप है कि किश्वर ने अपने 'वेरिफाइड' एक्स (ट्विटर) हैंडल से सुनियोजित तरीके से भ्रामक और भड़काऊ सामग्री प्रसारित की। बता दे कि इस मामले में अदालत में सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट, ईमेल पत्राचार और व्हाट्सएप चैट को बतौर डिजिटल साक्ष्य पेश किया गया है। अधिवक्ता का दावा है कि पूर्व में दिए गए कानूनी नोटिस और सुधार की अपीलों के बावजूद आरोपी ने न तो साक्ष्य दिए और न ही पोस्ट हटाए, बल्कि अपमानजनक भाषा का प्रयोग जारी रखा।
👉 इस मामले में अब 15 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया जाएगा या नहीं।
