✍️✍️ "Bail granted for PAC jawan in attempt to murder case."


✍️✍️ PAC जवान की जमानत मंजूर, हत्या के प्रयास का मामला 

वाराणसी।

सत्र न्यायालय के न्यायाधीश संजीव शुक्ला की अदालत ने थाना मंडुवाडीह में दर्ज सब्जी मंडी में लेनदेन को लेकर हुए विवाद के बाद मारपीट और हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी पीएसी (PAC) जवान आशुतोष सिंह उर्फ शानू की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की दो जमानतों पर रिहाई का आदेश दिया है।

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता कृपा शंकर सिंह व उमा शंकर ने पक्ष रखा""


क्या था मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 21 मार्च 2026 की शाम करीब 7:00 बजे की है। भुल्लनपुर स्थित सब्जी दुकान पर लेनदेन की बात को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि 34वीं वाहिनी पीएसी में तैनात जवान आशुतोष कुमार सिंह ने लोहे की रॉड से हमला कर दुकानदार राधेश्याम बिंद और उनकी पत्नी गीता देवी को बुरी तरह घायल कर दिया था। दोनों घायलों का इलाज बीएचयू (BHU) के ट्रॉमा सेंटर में चला, जहां उन्हें गंभीर चोटें (Traumatic Brain Injury) होने की पुष्टि हुई थी।


बचाव पक्ष की दलील

आरोपी के विद्वान अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को रंजिशन गलत तरीके से फंसाया गया है। दलील दी गई कि आरोपी का कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है और वह पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि वह एक जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी हैं, इसलिए उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है।


अदालत का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सत्र न्यायालय के न्यायाधीश ने आरोपी की जमानत मंजूर करते हुए कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं:

  • साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं: आरोपी किसी भी गवाह को डराने या प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।
  • जांच में सहयोग: विवेचना के दौरान पुलिस को पूरी मदद करनी होगी।
  • नियमित उपस्थिति: मुकदमे की हर सुनवाई पर आरोपी को न्यायालय में उपस्थित होना होगा।
  • अपराध की पुनरावृत्ति नहीं: जमानत पर रहने के दौरान आरोपी किसी भी अन्य आपराधिक गतिविधि में संलिप्त नहीं होगा।

👉 अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इन शर्तों का उल्लंघन किया गया, तो जमानत रद्द की जा सकती है। बता दे कि यह मामला थाना मंडुवाडीह के अंतर्गत धारा 109(1) BNS (भारतीय न्याय संहिता) के तहत दर्ज है।

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