वाराणसी।
वाराणसी की एक विशेष अदालत (SC/ST एक्ट) ने मारपीट और गंभीर आरोपों में घिरे अभियुक्त अब्दुल कलाम की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। यह मामला प्रेम प्रसंग, पहचान छिपाकर दोस्ती करने और बाद में हुए हिंसक संघर्ष से जुड़ा है, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए थे।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता जुनैद जाफरी ने पक्ष रखा""
क्या है पूरा मामला?
वादिनी का आरोप था कि वह कैंट थाना क्षेत्र में रहती है और एक बिरयानी की दुकान पर उसका परिचय 'शान सिंह' नाम के व्यक्ति से हुआ था। बाद में उसे पता चला कि वह व्यक्ति मुस्लिम है और उसका असली नाम 'सऊद' है। वादिनी के अनुसार, जब उसने दूरी बनानी चाही, तो आरोपी ने उसे बदनाम करने की कोशिश की और अपने साथियों के साथ मिलकर उसके घर पर हमला किया। इस दौरान जातिसूचक गालियां देने और जान से मारने की धमकी का भी आरोप लगाया गया था।
कोर्ट का फैसला
विशेष न्यायाधीश सुधाकर राय ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि मुख्य आरोप 'सऊद' पर हैं, जिनके साथ वादिनी के संबंधों की बात कही गई है। अब्दुल कलाम पर केवल साथ जाने का आरोप है और प्राथमिकी में उसका नाम भी स्पष्ट रूप से शामिल नहीं था। अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी अब्दुल कलाम को ₹25,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि की प्रतिभूति दाखिल करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त को विचारण में सहयोग करना होगा और गवाहों को प्रभावित नहीं करना होगा।
