✍️✍️ UP College Murder Case: Bail Plea of Main Accused Manjeet Chauhan Rejected


✍️✍️ यूपी कॉलेज हत्याकांड: मुख्य आरोपी मंजीत चौहान की जमानत याचिका खारिज

वाराणसी।

जनपद के प्रतिष्ठित यूपी कॉलेज (उदय प्रताप कॉलेज) परिसर में हुए सनसनीखेज सूर्यप्रताप सिंह हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी मंजीत चौहान को कोई भी राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता और चश्मदीद गवाहों के बयानों को देखते हुए आरोपी की प्रथम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

""अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध जिला शासकीय फौजदारी अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान व विवेक शंकर तिवारी ने किया""


क्या था मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 20 मार्च 2026 की है, जब प्रशासनिक भवन के पास आरोपी मंजीत चौहान और उसके साथी अनुज सिंह ने पुरानी रंजिश और विवाद के चलते छात्र सूर्यप्रताप सिंह पर अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं। घायल छात्र को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 'ओवरकिल' की पुष्टि

अदालती कार्यवाही के दौरान मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया। रिपोर्ट के अनुसार, सूर्यप्रताप को सिर, कान और सीने पर सटाकर कुल चार गोलियां मारी गई थीं। शरीर पर मिले 'मजल इम्प्रिंट' (हथियार की नाल के निशान) यह दर्शाते हैं कि हमलावर ने पिस्टल सटाकर फायर किया था। डॉक्टर ने इस मामले को 'ओवरकिल' (जरूरत से ज्यादा प्रहार) करार दिया है।

सीसीटीवी और चश्मदीद गवाह बने आधार

जमानत का विरोध करते हुए सरकारी अधिवक्ता ने दलील दी कि:

  • सीसीटीवी फुटेज:केस डायरी के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में मंजीत चौहान को स्पष्ट रूप से सूर्यप्रताप पर पिस्टल से फायर करते देखा गया है।
  •  चश्मदीद गवाह: एक छात्रा (शिवांगी सिंह) ने अपने बयान में बताया कि उसने मंजीत को सूर्यप्रताप के कान के पास पिस्टल सटाकर गोली मारते हुए देखा था।
  •  धमकी का साक्ष्य:मृतक के पिता ने बयान दिया कि घटना से तीन दिन पहले ही आरोपियों ने अंजाम भुगतने की धमकी दी थी।

अदालत का फैसला

आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसे झूठा फंसाया गया है और मृतक का स्वभाव ही आपराधिक था। हालांकि, सत्र न्यायाधीश ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना। न्यायालय ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान में इस तरह की वारदात से अन्य छात्र-छात्राओं में भय व्याप्त हुआ है। अपराध की प्रकृति और साक्ष्यों की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने मंजीत चौहान की दोनों जमानत याचिकाएं (धारा 103(1) व अन्य) निरस्त कर दीं।


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