✍️✍️ 12 लाख की साइबर ठगी के आरोपी को अदालत से मिली जमानत
वाराणसी।
बिना यूपीआई (UPI) इस्तेमाल किए खाते से 12 लाख रुपये गायब होने के सनसनीखेज मामले में गिरफ्तार आरोपी विनय कुमार को वाराणसी की जिला एवं सत्र अदालत से बड़ी राहत मिल गई है। सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। अदालत ने विनय कुमार को 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और उतनी ही राशि के जमानतदार की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव, अजय कुमार मौर्य, जय सरदार व अजय कुमार ने पक्ष रखा""
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़ित शिवलाल हरिजन ने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि 28 मार्च से 20 अप्रैल 2026 के बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके एक्सिस बैंक खाते से विभिन्न किश्तों में करीब 12 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर निकाल लिए, जबकि उन्होंने कभी यूपीआई का उपयोग ही नहीं किया था। जांच के दौरान साइबर क्राइम पुलिस ने बलिया निवासी विनय कुमार को गिरफ्तार किया और उसके पास से चार मोबाइल, नकदी और दो फर्जी आधार कार्ड बरामद करने का दावा करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की कई गंभीर धाराएं लगाईं।
अदालत ने लगाईं ये कड़ी शर्तें
सत्र न्यायाधीश ने उभय पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपी विनय कुमार का कोई पुराना आपराधिक इतिहास न होने और 27 मई 2026 से जेल में बंद होने के आधार पर जमानत स्वीकार कर ली। हालांकि, रिहाई के साथ कोर्ट ने कुछ सख्त निर्देश भी दिए हैं:
- आरोपी को हर तारीख पर अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
- वह किसी भी गवाह को डराने, धमकाने या प्रलोभन देने का प्रयास नहीं करेगा।
- बिना कोर्ट की अनुमति के देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेगा।
- अपना स्थाई या अस्थाई पता बदलने पर कोर्ट को सूचित करना अनिवार्य होगा।
अदालत ने साफ किया है कि यदि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन किया गया, तो अभियोजन पक्ष उसकी जमानत निरस्त कराने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगा।
