✍️✍️ मारपीट और धमकी के आरोपी चार युवाओं को मिली अग्रिम जमानत
वाराणसी:
रामनगर थाना क्षेत्र में घटित एक चर्चित मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के मामले में वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय ने राहत देते हुए चारों आरोपियों को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। यह मामला 21 मई 2026 की रात को हुई एक हिंसक घटना से जुड़ा है।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अजय गेठे ने पक्ष रखा""
क्या था पूरा मामला?
वादी रोहित सिन्हा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि 21 मई 2026 की रात करीब 8:35 बजे जब वह अपने मित्र लक्ष्य केशरी के साथ दुर्गा मंदिर से लौट रहे थे, तभी दिलीप यादव, विवेक सिंह, शिवम पाठक, प्रतीक सिंह और 5-6 अन्य अज्ञात लोगों ने उन्हें घेर लिया। वादी का आरोप था कि आरोपियों ने उन पर तमंचा, लाठी-डंडे और पत्थरों से हमला किया, जिससे उनका मित्र लक्ष्य केशरी बेहोश हो गया। वादी ने यह भी आरोप लगाया कि दिलीप यादव उर्फ दरोगा ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।
मेडिकल रिपोर्ट में क्या आया सामने?
विवेचना के दौरान पुलिस ने मजरूब रोहित सिन्हा और लक्ष्य केशरी का मेडिकल परीक्षण करवाया। मेडिकल रिपोर्ट में लक्ष्य केशरी के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटों का उल्लेख किया गया था, हालांकि चिकित्सक ने इन चोटों को 'सामान्य प्रकृति' का बताया। लक्ष्य के सिर का सीटी स्कैन भी कराया गया, जिसमें किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति नहीं पाई गई।
आरोपियों का पक्ष और न्यायालय का निर्णय
अभियुक्तों के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किलों को पुरानी रंजिश के चलते साजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने न्यायालय को बताया कि सभी आरोपी छात्र हैं और उनका कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं है। इसके विपरीत, जिला शासकीय अधिवक्ता ने मामले की गंभीरता और आरोपियों के खिलाफ अन्य मुकदमे लंबित होने का हवाला देते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, सत्र न्यायाधीश ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक मामले में निर्धारित दिशा-निर्देशों के आलोक में चारों आरोपियों विवेक सिंह, प्रतीक सिंह, शिवम पाठक और दिलीप यादव उर्फ दरोगा की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
न्यायालय द्वारा लगाई गई प्रमुख शर्तें
न्यायालय ने आरोपियों को राहत देते हुए कड़े निर्देश भी दिए:
- प्रत्येक आरोपी को 50,000 रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि के दो प्रतिभू (सुरक्षा) प्रस्तुत करने होंगे।
- आरोपियों को पुलिस जांच में सहयोग करना होगा और बुलाए जाने पर पूछताछ के लिए उपस्थित होना होगा।
- आरोपी किसी भी गवाह को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धमकी नहीं देंगे और न ही उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करेंगे।
- न्यायालय की अनुमति के बिना आरोपी भारत छोड़कर बाहर नहीं जा सकेंगे।
