✍️✍️ Juvenile Justice Board order set aside, Court grants bail to juvenile in criminal appeal, custody handed over to parents


✍️✍️ किशोर न्याय बोर्ड का आदेश निरस्त, कोर्ट ने किशोर को दी आपराधिक अपील में जमानत, माता-पिता को सौंपी जिम्मेदारी

वाराणसी।

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, वाराणसी की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में किशोर न्याय बोर्ड के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें एक किशोर की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी। अदालत ने किशोर को 50,000 रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और समान राशि के एक प्रतिभू पर रिहा करने का आदेश दिया है।

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता जुनैद जाफरी ने पक्ष रखा""

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला थाना लालपुर/पाण्डेयपुर, वाराणसी से संबंधित है, जहाँ 28 नवंबर 2025 को वादी के घर में चोरी की घटना हुई थी। वादी के अनुसार, वे परिवार सहित एक तिलक समारोह में बाहर गए थे। इसी दौरान अज्ञात चोरों ने घर के दरवाजे और अलमारी का ताला तोड़कर नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और मोबाइल आदि चोरी कर लिए थे। पुलिस ने इस मामले में किशोर को नामजद करते हुए किशोर न्याय बोर्ड में आरोप पत्र प्रेषित किया था।

न्यायालय का तर्क और निर्णय

किशोर की ओर से दाखिल आपराधिक अपील में विद्वान अधिवक्ता ने दलील दी कि किशोर पूरी तरह निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। किशोर के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क दिया कि किशोर न्याय बोर्ड का आदेश कानूनी प्रावधानों के विपरीत और केवल अनुमान पर आधारित था।

👉 बता दे कि अदालत ने अपने फैसले में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख व संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 12 का उल्लेख करते हुए कहा कि जमानत खारिज करने के लिए जो शर्तें आवश्यक हैं, वे इस मामले में पूरी नहीं होती हैं। सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट में भी किशोर का कोई आपराधिक इतिहास नहीं पाया गया और न ही वह किसी ज्ञात अपराधी के संपर्क में होने के प्रमाण मिले। माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों का हवाला देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत खारिज करने का आधार केवल अनुमान नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्य होना चाहिए।

अदालत की सख्त शर्तें

न्यायालय ने किशोर को उसके संरक्षक (पिता) को सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही शर्तें निर्धारित कि की संरक्षक यह सुनिश्चित करेगा कि किशोर किसी भी अपराधी के संपर्क में न आए। किशोर को ऐसी परिस्थितियों से दूर रखा जाएगा जिससे उसे कोई नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक क्षति हो सके। संरक्षक किशोर के नैतिक, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विकास का पूर्ण ध्यान रखेगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post