✍️✍️ Major decision in kidnapping and abduction case: Accused acquitted


✍️✍️ अपहरण और बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में बड़ा फैसला: आरोपी दोषमुक्त

वाराणसी जनपद के रामनगर थाना क्षेत्र से जुड़े चर्चित अपहरण मामले  में अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट वाराणसी सुनील कुमार-III की अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त रवि सोनकर उर्फ टिंकू को IPC धाराओं 363 और 366 के आरोपों से संदेह का लाभ देते हुए पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है. 

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता श्रीकांत प्रजापति, उदय नारायण सिंह व सहयोगी फौजदारी अधिवक्ता विनोद यादव ने पक्ष रखा""

क्या था पूरा मामला?

वादी मुकदमा द्वारा थाना रामनगर में तहरीर दी गई थी कि उनकी लगभग 15 वर्षीय पुत्री को 17 जुलाई 2023 को सुबह 11 बजे रवि सोनकर उर्फ टिंकू नामक युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ कहीं भगा ले गया है. वादी की आशंका के आधार पर पुलिस ने रामनगर थाने में आईपीसी की धारा 363 और 366 के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की थी. पुलिस ने आरोप-पत्र न्यायालय में प्रेषित किया, जिसके बाद अदालत में विचारण की प्रक्रिया 05 अगस्त 2024 से शुरू हुई.

विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 07 साक्षियों को प्रस्तुत किया गया. मुख्य गवाह के रूप में पीड़िता (PW-1), वादी मुकदमा (PW-2) और पीड़िता की माता (PW-3) के बयान दर्ज किए गए. पीड़िता ने अपने बयानों में स्पष्ट किया कि वह अपनी मर्जी से गई थी और उसके साथ किसी प्रकार का कोई गलत काम नहीं हुआ है. इसके अलावा उसने मुख्य परीक्षा के दौरान अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं किया, जिसके बाद उसे पक्षद्रोही घोषित किया गया. मुकदमे के वादी (पिता) और पीड़िता की माता ने भी अदालत के समक्ष दिए गए बयानों में यह समर्थन नहीं किया कि अभियुक्त उनकी पुत्री को बहला-फुसलाकर ले गया था. अपने बयानों से मुकरने के कारण इन्हें भी पक्षद्रोही घोषित किया गया.

अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध समस्त मौखिक और अभिलेखीय साक्ष्यों का बारीकी से परिशीलन किया. न्यायाधीश ने अपने निर्णय में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की विभिन्न महत्वपूर्ण दृष्टांतों का हवाला दिया. अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्यों के जरिए अभियुक्त पर लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है. पीड़िता और मुख्य गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास होने के कारण उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

अदालत ने पाया कि वादी मुकदमा (पिता) ने थाने में दी गई अपनी लिखित तहरीर में जो आरोप लगाए थे, न्यायालय में अपने सशपथ बयान के दौरान उसने उन तथ्यों से पूरी तरह इनकार कर दिया. इसे प्रथम दृष्ट्या न्यायालय ने मिथ्या साक्ष्य माना. अंततः अदालत ने अभियुक्त रवि सोनकर उर्फ टिंकू को राहत देते हुए उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया और उसके जमानत बंध पत्र निरस्त कर दिए.

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