✍️✍️ Political atmosphere heats up over women's reservation before elections, bar stirred by lawyers' protest

 


✍️✍️ चुनाव से पहले महिला आरक्षण पर गरमाया माहौल, अधिवक्ताओं के धरने से बार में मची हलचल

""महिला आरक्षण के मुद्दे पर अधिवक्ताओं का धरना, महामंत्री के आश्वासन पर समाप्त""

""बार की कार्यशैली पर उठे सवाल, पत्रक मिलने पर कार्यकारिणी की बैठक का आश्वासन""

वाराणसी। सेंट्रल बार एसोसिएशन में महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर शनिवार को अधिवक्ताओं के एक वर्ग ने सेंट्रल बार गेट के सामने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, बल्कि आरक्षण के मुद्दे को उठाए जाने के समय, प्रक्रिया और बार पदाधिकारियों की कार्यशैली को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।

धरने की जानकारी मिलने पर सेंट्रल बार के महामंत्री आशीष कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और धरनारत अधिवक्ताओं से वार्ता की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अधिवक्ता अपनी मांगों और आपत्तियों से संबंधित एक पत्रक सेंट्रल बार को उपलब्ध कराएं। पत्रक प्राप्त होने के बाद बार कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर उसके परिप्रेक्ष्य में विचार-विमर्श किया जाएगा। यदि कार्यकारिणी की बैठक में किसी निष्कर्ष पर सहमति नहीं बनती है तो आम सभा की बैठक आहूत कर मामले का निस्तारण कराया जाएगा।

महामंत्री आशीष सिंह के इस मौखिक आश्वासन के बाद फिलहाल धरनारत अधिवक्ताओं ने बैठक में होने वाले निर्णय तक अपना धरना समाप्त कर दिया।

फरवरी में पत्र मिलने के बावजूद बैठक न बुलाने पर सवाल

प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का कहना था कि बार काउंसिल की ओर से चुनाव में महिला आरक्षण से संबंधित पत्र फरवरी में ही संबंधित बार एसोसिएशनों को भेजा गया था। उनका सवाल था कि यदि यह विषय महत्वपूर्ण था तो उसी समय स्थानीय बार पदाधिकारियों की ओर से बैठक क्यों नहीं बुलाई गई और अधिवक्ताओं को इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं दी गई।

अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि बार एसोसिएशन के सूचना पट्ट पर समय रहते इस संबंध में सूचना नहीं लगाई गई और न ही आम सभा की बैठक बुलाकर इस विषय पर अधिवक्ताओं की राय जानने की पहल की गई।

चुनाव नजदीक आने पर मुद्दा उठाने पर जताई आपत्ति

धरनारत अधिवक्ताओं ने कहा कि वार्षिक चुनाव में अब दो महीने से भी कम समय शेष है। ऐसे में महिला आरक्षण के मुद्दे को अचानक सोशल मीडिया के माध्यम से प्रमुखता से उठाए जाने को लेकर अधिवक्ताओं के बीच सवाल उत्पन्न हुए हैं।

उनका कहना था कि कई प्रत्याशी लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया से संबंधित किसी महत्वपूर्ण बदलाव का असर संभावित प्रत्याशियों और पूरी चुनाव प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी संबंधित अधिवक्ताओं को विश्वास में लिया जाना चाहिए।

आगामी सत्र से लागू करने की मांग

प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने कहा कि वे महिला आरक्षण के सिद्धांत के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मांग है कि यदि महिला आरक्षण लागू किया जाना है तो इसे आगामी सत्र से लागू किया जाए, ताकि सभी अधिवक्ताओं को पर्याप्त समय पहले नियमों की जानकारी हो और चुनाव प्रक्रिया स्पष्ट एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।

धरने में अभिषेक चौबे ‘मोनू’, आशीष श्रीवास्तव, अनूप सिंह, विजय बहादुर, पंकज उपाध्याय, मनिंद्र तिवारी, अभिषेक राय, योगेंद्र सिंह, संदीप मिश्रा, टोनी यादव, अनुराग सिंह, अखिलेश मिश्रा और विष्णु स्वरूप त्रिपाठी समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

महामंत्री के आश्वासन के बाद फिलहाल धरना समाप्त हो गया है। अब मामले पर सेंट्रल बार कार्यकारिणी की बैठक और आवश्यकता पड़ने पर आम सभा में होने वाले निर्णय पर अधिवक्ताओं की नजर रहेगी।

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