✍️✍️ Major relief for the accused in extortion and assault case, bail granted.

 


✍️✍️ रंगदारी और मारपीट के आरोपी को बड़ी राहत,जमानत मंजूर 

 वाराणसी के सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए वर्ष 2026 के एक आपराधिक मामले में आरोपी वाजिद अली को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया । सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और मामले के तथ्यों का अवलोकन करने के बाद यह निर्णय लिया है।

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अजय गेठे ने पक्ष रखा""

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी हरिशंकर अग्रहरि, जो कि एक थोक मोबाइल व्यापारी हैं, ने वाजिद अली के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि वर्ष 2019 में वाजिद अली ने उनसे रंगदारी मांगी थी और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी थी। इस संबंध में थाना चौक में एफआईआर दर्ज किया गया था, जिसकी गवाही वर्तमान में चल रही है।

वादी का आरोप है कि 11 जून 2026 को रात के समय वाजिद अली ने उन्हें दुकान के पास रोककर गाली-गलौज की, मारपीट की और उनसे 3700 रुपये छीन लिए। इस घटना के बाद वाजिद अली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

बचाव पक्ष का तर्क

जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान वाजिद अली के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उन्हें पुरानी रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है। अधिवक्ता ने दावा किया कि न तो कोई मारपीट हुई और न ही कोई रुपये छीने गए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि घटना का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है और उनका मुवक्किल निर्दोष है।

वहीं, वादी पक्ष के अधिवक्ता और जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है और उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मामले दर्ज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी ने वादी को गवाही देने से रोकने के लिए धमकाया है, इसलिए जमानत याचिका निरस्त की जानी चाहिए।

न्यायालय का आदेश

दोनों पक्षों की बहस सुनने और पत्रावली का बारीकी से अध्ययन करने के बाद, सत्र न्यायाधीश ने गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना वाजिद अली को सशर्त जमानत देने का आदेश दिया।

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