✍️✍️ Major relief for all five accused in the much-discussed Jaitpura assault case; court grants anticipatory bail

 


✍️✍️ जैतपुरा के बहुचर्चित मारपीट कांड में पाँचों आरोपियों को बड़ी राहत, कोर्ट ने मंजूर की अग्रिम जमानत

वाराणसी 

 जैतपुरा थाना क्षेत्र के बहुचर्चित मारपीट एवं घर में घुसकर हमला करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय  ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए पाँचों नामजद अभियुक्तों की अग्रिम जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। न्यायालय ने प्रत्येक अभियुक्त को 50-50 हजार रुपये के दो सक्षम प्रतिभू (जिसमें एक स्थानीय प्रतिभू अनिवार्य होगा) तथा समान धनराशि के व्यक्तिगत बंधपत्र पर अग्रिम जमानत प्रदान की है। 

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अजय गेठे ने पक्ष रखा""

मामला थाना जैतपुरा से संबंधित है। अग्रिम जमानत का लाभ पाने वाले अभियुक्तों में इंदेल, अलाउद्दीन, रुबिला बीबी, निजामुद्दीन उर्फ निजाम तथा हकीम शामिल हैं, जो मूल रूप से पुरुलिया (पश्चिम बंगाल) के निवासी हैं और वर्तमान में जैतपुरा, वाराणसी में रह रहे हैं।

पुरानी रंजिश बनी हिंसक संघर्ष की वजह

अभियोजन पक्ष के अनुसार वादिनी सोनाली खातून ने जैतपुरा थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया था कि 4 जुलाई 2026 की शाम लगभग 7 बजे पुरानी रंजिश के चलते बड़ी संख्या में लोग उनके घर में घुस आए। आरोप है कि हमलावरों ने लोहे के रम्भे और ईंटों से हमला कर उनकी माता मैना बीबी को गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे वह बेहोश हो गईं। बीच-बचाव करने पर वादिनी और उसकी बहन को भी चोटें आईं तथा जान से मारने की धमकी दी गई।

इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 110, 351(3), 352, 115(2), 333 एवं 191(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की।

बचाव पक्ष ने बताया झूठा मुकदमा

अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने न्यायालय को बताया कि अभियुक्त निर्दोष हैं और उन्हें पुरानी रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है। विद्वान अधिवक्ता ने दलील दी कि 23 मई 2026 को बच्चों के विवाद को लेकर वादिनी पक्ष ने पहले अभियुक्त इंदेल शेख के साथ मारपीट की थी तथा घर में तोड़फोड़ भी की थी। इस संबंध में थाना जैतपुरा में मुकदमा पहले से दर्ज है।

बचाव पक्ष का कहना था कि उसी मुकदमे में समझौते का दबाव बनाने के उद्देश्य से वादिनी पक्ष अभियुक्तों के घर पहुंचा, जहां विवाद के दौरान मामूली झड़प हुई। विद्वान अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि केस डायरी एवं चिकित्सीय अभिलेखों में घायल मैना बीबी को गंभीर चोट का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। साथ ही अभियुक्तों में महिलाएं भी शामिल हैं और आरोपित धाराओं में अधिकतम सात वर्ष तक के कारावास का ही प्रावधान है।

पत्रावली के परीक्षण के बाद अदालत ने दी राहत

दोनों पक्षों की दलीलों, केस डायरी तथा उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश यजुवेन्द्र विक्रम सिंह ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना अभियुक्तों को अग्रिम जमानत का लाभ देने का आदेश पारित किया।

अदालत ने लगाईं कड़ी शर्तें

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत का लाभ निम्न शर्तों के पालन पर ही प्रभावी रहेगा—

  • - प्रत्येक अभियुक्त 50-50 हजार रुपये के दो सक्षम प्रतिभू (एक स्थानीय प्रतिभू सहित) एवं समान धनराशि का व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करेगा।
  • - अभियुक्त बिना न्यायालय की अनुमति भारत की सीमा से बाहर नहीं जाएंगे।
  • - विवेचना एवं विचारण के दौरान जांच में पूरा सहयोग करेंगे तथा अनावश्यक स्थगन नहीं मांगेंगे।
  • - किसी भी गवाह या मामले से जुड़े व्यक्ति को प्रभावित करने, डराने-धमकाने अथवा प्रलोभन देने का प्रयास नहीं करेंगे।
  • - न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का कड़ाई से पालन करेंगे।

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