✍️✍️ Major verdict by court in dowry harassment and domestic violence case, complainant's interim maintenance application dismissed



✍️✍️ दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा मामले में अदालत का बड़ा फैसला, परिवादिनी का अंतरिम भरण-पोषण प्रार्थना पत्र खारिज

वाराणसी:

जनपद के चेतगंज थाना क्षेत्र से जुड़े एक चर्चित घरेलू हिंसा एवं दहेज प्रताड़ना के मामले में वाराणसी के न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने परिवादिनी रोजी बानो उर्फ ईशा द्वारा प्रस्तुत अंतरिम भरण-पोषण प्रार्थना पत्र को साक्ष्यों और पूर्ववर्ती न्यायिक आदेशों के आधार पर निरस्त कर दिया है। यह मामला पति अजहर खान और उसके परिजनों पर दहेज की मांग, शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न तथा गंभीर धाराओं में दर्ज मुकद्मों से जुड़ा हुआ है।

""अदालत में आरोपियों की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता रमेश यादव ने पक्ष रखा'"

प्राप्त विवरण के अनुसार, परिवादिनी का विवाह मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार 10 जुलाई 2020 को हुकुलगंज, वाराणसी निवासी अजहर खान के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के बाद जब वह ससुराल गई, तो ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा कम दहेज लाने का ताना देने का दौर शुरू हुआ। परिवादिनी का आरोप है कि अतिरिक्त दहेज के रूप में पांच लाख रुपये नकद तथा मायके के मकान को अपने पक्ष में रजिस्ट्री कराने का दबाव बनाया जाने लगा। विरोध करने पर उसे तरह-तरह की मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी जाने लगी।

मामले में सबसे गंभीर घटना 30 जनवरी 2023 की रात की बताई गई है, जब परिवादिनी के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। आरोप है कि पति अजहर खान, ससुर अबूजर खान, सास रुखसाना बेगम, ननद हुमा खान और सूही खान ने जान से मारने की नीयत से बाल पकड़कर जमीन पर घसीटा और गंभीर मारपीट की। किसी तरह जान बचाकर कमरा बंद कर परिवादिनी ने सी.ओ. साहब को फोन कर सूचना दी।

महिला थाने की पुलिस ने 31 जनवरी 2023 को ससुराल पहुंचकर घायल अवस्था में परिवादिनी का शिव प्रसाद गुप्त चिकित्सालय में मेडिकल मुआयना कराया। इसके आधार पर अभियुक्तगणों (पति अजहर खान, ससुर अबूजर खान, सास रुखसाना बेगम, ननद हुमा खान व सूही खान) के विरुद्ध धारा 498ए, 377, 323, 504, 505 आईपीसी एवं 3/4 डीपी एक्ट के तहत मुकदमा कायम कर चार्जशीट दाखिल की गई।

सुनवाई के दौरान परिवादिनी ने धारा 23 घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी, जिसमें पति (जो कि चार्टर्ड अकाउंटेंट के यहाँ सीनियर क्लर्क के रूप में कार्यरत है और जिसका वेतन 30,000/- से 40,000/- रुपये प्रतिमाह बताया गया है) की आय का हवाला दिया गया।

वहीं, विपक्षी (पति) की ओर से आपत्ति जताते हुए कहा गया कि परिवार न्यायालय द्वारा पूर्व में ही दिनांक 15.01.2025 को पारित आदेश के माध्यम से 5000/- रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण का आदेश दिया जा चुका है। पत्रावली के संपूर्ण अवलोकन के बाद न्यायालय ने माना कि परिवादिनी को परिवार न्यायालय द्वारा आदेशित अंतरिम भरण-पोषण की धनराशि से वाद दौरान भरण-पोषण प्राप्त हो सकता है। न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक जायसवाल ने न्यायहित में नया अंतरिम भरण-पोषण प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।

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