वाराणसी:
बनारस के सारनाथ थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक विवाहिता ने अपने ही ससुरालियों पर घर में घुसकर ताला तोड़ने, कीमती सामान लूटने और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। लंबे समय से पुलिस की चौखट पर न्याय की गुहार लगा रही प्रीति सिंह की अर्जी पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी ने पुलिस को तत्काल FIR दर्ज कर विवेचना शुरू करने के कड़े निर्देश दिए हैं। बता दे कि इस पूरे मामले में फौजदारी अधिवक्ता रूप कुंवर सेठ द्वारा न्यायालय में प्रभावशाली तथ्यों को रखा गया था।
""पीड़िता ने अपने अधिवक्ताओं रूप कुंवर सेठ, गौरांग बाजपेई, सौरभ यादव व मोनू राय के जरिए अदालत में बीएनएनएस की धारा 173(4) के जरिए प्रार्थना पत्र दिया था""
विवाह से ही शुरू हुई प्रताड़ना की दास्तान
पीड़िता प्रीति सिंह ने न्यायालय को बताया कि उनका विवाह 17 नवंबर 2013 को अभय प्रताप सिंह के साथ आपसी सहमति से हुआ था। आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल के लोग विशेषकर सास सीता सिंह, देवर जय प्रकाश सिंह और तन्नु सिंह दहेज न मिलने के कारण उनसे नफरत करने लगे। परिवार के लगातार विरोध के चलते उन्हें और उनके पति को अपनी जान बचाने के लिए पहले भी माननीय उच्च न्यायालय से संरक्षण लेना पड़ा था।
31 मई की रात: जब उजड़ गया आशियाना
पीड़िता के अनुसार, 31 मई 2026 की रात जब वे अपने पति के साथx सारनाथ स्थित पैतृक आवास पहुँचीं, तो वहां का मंजर देख वे सन्न रह गईं। उनके कमरे का ताला टूटा हुआ था और अंदर रखा सारा सामान गायब था। कमरे से कंप्यूटर, नकदी, आभूषण और एक मोटर सायकिल नदारद थी। जब उन्होंने इस घटना का विरोध किया, तो विपक्षीगणों ने उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और दोबारा घर में घुसने पर 'काटकर मार डालने' की धमकी दी। यहाँ तक कि जाते समय उन पर पत्थर भी फेंके गए।
लगातार शिकायतों के बावजूद पुलिस बनी मूकदर्शक
न्यायालय में पेश दस्तावेजों के अनुसार, यह घटना अचानक नहीं हुई है। इससे पहले भी 03 अक्टूबर 2022 और 24 दिसंबर 2025 को उनके पति के साथ मारपीट की गई थी। पति ने डीसीपी सहित तमाम उच्च अधिकारियों को ई-मेल और लिखित शिकायतों के माध्यम से सूचित किया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने विपक्षीगणों के प्रभाव में आकर कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की।
न्यायालय की सख्त टिप्पणी: "प्रथम दृष्टया मामला गंभीर"
मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार ने पुलिस द्वारा दी गई उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि 'कोई मुकदमा दर्ज नहीं है'। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध कारित होना प्रतीत होता है। न्यायालय ने इसे न्यायहित में स्वीकार करते हुए थाना सारनाथ पुलिस को निर्देश दिया है कि संबंधित धाराओं में तुरंत FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
