✍️✍️साइबर अपराध मामले में 3 आरोपियों को कोर्ट से राहत, मिली जमानत
""वाराणसी सत्र न्यायालय ने लगाईं कड़ी शर्तें, गवाहों को प्रभावित न करने और हर तारीख पर उपस्थित रहने का निर्देश""
वाराणसी। साइबर अपराध से जुड़े एक मामले में वाराणसी की सत्र अदालत ने तीन आरोपियों युवराज वर्मा, आशीष यादव और सुजल सिंह को जमानत प्रदान कर राहत दी है। सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने तथा पत्रावली का अवलोकन करने के बाद तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें निर्धारित शर्तों के अधीन रिहा करने का आदेश दिया।
""अदालत में आरोपी आशीष यादव और सुजल सिंह की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता नृपेंद्र प्रताप सिंह 'नन्हे', वेंकटेश्वर सिंह, अभय कुमार सिंह, आनंद गुप्ता व सहयोगी अधिवक्ता सुशांत वर्मा व आदर्श सिंह ने पक्ष रखा""
फर्जी दस्तावेज और बैंक खातों के इस्तेमाल का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों पर फर्जी दस्तावेजों एवं बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर धोखाधड़ी करने तथा अवैध रूप से धन अर्जित करने का आरोप था। पुलिस विवेचना के दौरान आरोपियों के कब्जे से विभिन्न बैंकों की पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज बरामद किए जाने का दावा किया गया।
अभियोजन का आरोप था कि आरोपी एक गिरोह के रूप में काम करते हुए लोगों को प्रलोभन देकर अथवा अन्य माध्यमों से उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से संबंधित लेनदेन के लिए किया जाता था।
50-50 हजार के व्यक्तिगत बंधपत्र पर जमानत
अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए प्रत्येक आरोपी को 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा इतनी ही धनराशि की जमानत राशि संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने जमानत देते समय आरोपियों पर कई महत्वपूर्ण शर्तें भी लगाई हैं, ताकि मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित न हो और आरोपी न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करते रहें।
हर तारीख पर व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी
अदालत ने निर्देश दिया कि तीनों आरोपी विचारण के दौरान पूरा सहयोग करेंगे और न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रत्येक तिथि पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे। साथ ही उन्हें किसी भी गवाह को प्रलोभित, प्रभावित या धमकाने से दूर रहने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा, यदि आरोपी अपने अस्थायी अथवा स्थायी पते में कोई परिवर्तन करते हैं तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित न्यायालय को देनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत की अवधि में आरोपी किसी अन्य अपराध में संलिप्त नहीं होंगे तथा न्यायालय की अनुमति के बिना देश छोड़कर विदेश नहीं जाएंगे।
शर्तों का उल्लंघन हुआ तो जमानत निरस्त कराने की कार्रवाई
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि आरोपियों द्वारा जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया जाता है, तो अभियोजन पक्ष को उनकी जमानत निरस्त कराने के लिए संबंधित न्यायालय के समक्ष आवेदन करने की स्वतंत्रता होगी।
