✍️✍️ Accused husband gets bail from court in dowry harassment case


✍️✍️ दहेज उत्पीड़न मामले में आरोपी पति को न्यायालय से मिली जमानत

वाराणसी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (वाराणसी) मनीष कुमार-II की अदालत ने थाना सिगरा में दर्ज दहेज उत्पीड़न और मारपीट से संबंधित एक मामले में आरोपी निजामुद्दीन को सशर्त जमानत दे दी है। न्यायालय ने आरोपी को ₹20,000 का व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की एक प्रतिभू प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश जारी किया।

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय व फौजदारी अधिवक्ता वीर प्रताप शर्मा ने पक्ष रखा""

क्या है पूरा मामला?

लल्लापुरा (थाना सिगरा, वाराणसी) निवासी सना पुत्री शहाबुद्दीन ने पुलिस आयुक्त को प्रार्थना पत्र देकर अपने ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न और मारपीट का गंभीर आरोप लगाया था। पीड़िता के अनुसार, उसका निकाह 13 जनवरी 2025 को मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ निजाम (पुत्र मुंसी, निवासी चितईपुर कन्दवा, वाराणसी) के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के समय पीड़िता के माता-पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दैनिक उपयोग की वस्तुओं के साथ ₹51,000 नगद, दो सोने की अंगूठी और सोने की चेन आदि उपहार स्वरूप दी थी।

अतिरिक्त दहेज की मांग और प्रताड़ना का आरोप

पीड़िता का आरोप है कि निकाह के बाद से ही उसका पति निजाम, सास सकीना, जेठानी रुबीना और जेठ फिरोज कम दहेज को लेकर उसे शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। ससुराल पक्ष द्वारा मोटरसाइकिल, सोने की चेन और 50 इंच का बड़ा टीवी लाने का दबाव बनाया जा रहा था। माँग पूरी न होने पर 14 अगस्त 2025 की आधी रात को पीड़िता के साथ मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया गया।

मामला थाने पहुंचने पर समझौता हुआ, लेकिन आरोप है कि 10 दिन बाद पुनः अतिरिक्त सामान और दहेज की मांग को लेकर पीड़िता के साथ मारपीट की गई। प्रताड़ना से तंग आकर पीड़िता ने पुलिस प्रशासन से न्याय और कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई थी, जिस पर थाना सिगरा में मुकदमा धारा 85, 115(2) बी.एन.एस. (BNS) एवं 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

अदालत का फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी निजामुद्दीन के विद्वान अधिवक्तागण ने तर्क दिया कि प्रार्थी को झूठा फंसाया गया है और उसने कोई अपराध कारित नहीं किया है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और विवेचना प्रचलित होने का हवाला देते हुए जमानत याचिका का विरोध किया। दोनों पक्षों के तर्कों, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपी निजामुद्दीन को ₹20,000 के मुचलके और प्रतिभू पर जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया।

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