वाराणसी। अपर सत्र न्यायाधीश, (कोर्ट संख्या-4) सर्वजीत सिंह ने दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े एक चर्चित मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी छह आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा, इसलिए आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता राजेन्द्र प्रताप सिंह, विनय जायसवाल,तेज़बहादुर यादव व सहयोगी अधिवक्ता प्रभु कुमार,दीपदर्शन प्रसाद,सरिता जायसवाल ने पक्ष रखा।
यह मामला थाना चौबेपुर में दर्ज मुकदमा से संबंधित था। मामले में बबलू यादव, महेंद्र यादव, दुर्गावती देवी, सरिता देवी, उर्मिला देवी और मुन्नी देवी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 306, 498ए तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत आरोप तय किए गए थे।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास और विसंगतियां थीं। न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और केवल औपचारिक साक्ष्यों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपियों ने पीड़िता को आत्महत्या के लिए विवश किया अथवा दहेज की मांग को लेकर उसके साथ क्रूरता की। इसी आधार पर सभी छह आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
