✍️✍️ 30 साल पुराने सरकारी धन गबन मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला: दो दोषी करार, सुनाई गई सजा
वाराणसी की विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम)-2 की पीठासीन अधिकारी पूनम पाठक ने तीन दशक पुराने दो चर्चित भ्रष्टाचार के मामलों में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो अभियुक्तों मुन्ना लाल और सुदामा यादव को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं के तहत कठोर कारावास और भारी अर्थदंड की सजा सुनाई है।
यह मामला जनपद चंदौली (तत्कालीन जनपद वाराणसी) के विकास खंड-बरहनी का है। यहां अनुसूचित जाति और निर्धन वर्ग के पात्र व्यक्तियों को स्वरोजगार के लिए ऋण प्रदान किया जाना था। योजना के तहत लाभार्थियों को रोजगार हेतु सामान क्रय करने के लिए और नगद राशि दी जानी थी।
आरोप था कि खंड विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान, ग्राम सेवक, बैंक मैनेजर और बैंक के दलाल ने आपसी मिलीभगत कर इस शासकीय धन का गबन कर लिया। दोनों मुकदमों में कुल 4 लाख रुपये (प्रत्येक मुकदमे में 2-2 लाख रुपये) का सरकारी धन हड़प लिया गया था। शिकायत मिलने पर जांच शुरू हुई, जो अंततः 30 साल बाद कोर्ट के फैसले तक पहुंची।
मामले में नामजद अन्य आरोपियों की मृत्यु हो जाने के बाद, अदालत ने मुख्य रूप से अभियुक्त मुन्ना लाल और सुदामा यादव के खिलाफ फैसला सुनाया। अदालत ने दोनों अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए अधिकतम 5 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अभियुक्त सुदामा यादव पर 32,000 रुपये और मुन्ना लाल पर 64,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक आलोक कुमार श्रीवास्तव और कमलेश कुमार यादव के साथ-साथ वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी गंगा सरन और अखिलेश ने प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप तीन दशक पुराने इस भ्रष्टाचार के मामले में दोषियों को सजा मिल सकी।
