✍️✍️ विवाहिता की जलकर मौत मामले में पति बरी
वाराणसी। जिले के चर्चित विवाहिता की जलकर मौत (आत्महत्या) के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी पति अशोक मौर्य को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप सिद्ध करने में असफल रहा।
""अदालत मे आरोपी की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अजय कुमार सिंह व संतोष झा ने पक्ष रखा ""
अभियोजन के अनुसार, मृतका की शादी करीब 18 वर्ष पूर्व अशोक मौर्य से हुई थी। मृतका की मां ने आरोप लगाया था कि अशोक मौर्य का किसी अन्य महिला से संबंध था, जिसके चलते वह अपनी पत्नी के साथ मारपीट करता था। 13 अगस्त 2018 को उसकी जलकर मौत हो गई थी। इसके बाद मृतका की मां ने पति पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113ए का लाभ इस मामले में नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह प्रावधान विवाह के सात वर्ष के भीतर हुई आत्महत्या के मामलों पर लागू होता है, जबकि मृतका की शादी को 18 वर्ष से अधिक समय बीत चुका था।
अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे यह सिद्ध हो सके कि आरोपी के किसी विशेष कृत्य या उकसावे के कारण ही मृतका ने आत्महत्या की। गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास पाया गया। वहीं, घटना के तुरंत बाद आरोपी द्वारा स्वयं पुलिस को सूचना दिए जाने को अदालत ने उसके पक्ष में एक महत्वपूर्ण परिस्थिति माना।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण जलना बताया गया, लेकिन आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई प्रत्यक्ष या ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।
अपर सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार ने अपने फैसले में कहा कि लंबी वैवाहिक अवधि, धारा 113ए के अनुप्रयोग का अभाव तथा पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण आरोपी को आत्महत्या के लिए उकसाना के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इन आधारों पर अदालत ने आरोपी अशोक मौर्य को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
