✍️✍️ प्राणघातक हमले के मामले में आरोपी को मिली राहत, सत्र न्यायालय ने दी जमानत
वाराणसी।
चौबेपुर थाना क्षेत्र में मारपीट एवं गंभीर चोट पहुँचाने के मामले में वाराणसी के जिला एवं सत्र न्यायालय से आरोपी अक्षय कुमार यादव (पुत्र बच्छे लाल यादव, निवासी ग्राम टीसीरा) को राहत मिली है। न्यायालय ने आरोपी का जमानत प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए उसे 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान धनराशि की दो जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया।
"" अदालत मे बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्तागण ओम प्रकाश यादव, मनीष मिश्रा, राजेश यादव व सहयोगी फौजदारी अधिवक्ता राम सिंह ने पक्ष रखा ""
क्या है मामला?
अभियोजन के अनुसार, वादिनी नगीना के पति 4 नवंबर 2025 की सुबह लगभग 9 बजे काम पर जा रहे थे। आरोप है कि घर से करीब 100 मीटर की दूरी पर अजय यादव और रितिक यादव ने उन्हें रोककर गाली-गलौज की तथा लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गए। उन्हें पहले चौबेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में दीनदयाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अभियोजन ने केस डायरी और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर चोटों की गंभीरता का उल्लेख किया।
बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष की ओर से न्यायालय में कहा गया कि आरोपी अक्षय कुमार यादव को झूठा फंसाया गया है। यह भी तर्क दिया गया कि राजभर बस्ती में यादव परिवार का एकमात्र मकान होने के कारण स्थानीय लोगों में पूर्व से ही रंजिश है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आवेदक द्वारा कोई प्राणघातक चोट नहीं पहुंचाई गई तथा सह-आरोपी अजय यादव को पूर्व में ही न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर आवेदक भी जमानत का अधिकारी है।
न्यायालय का आदेश
मामले के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों तथा दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद सत्र न्यायालय ने आरोपी का जमानत आवेदन स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने निर्देश दिया कि आरोपी विचारण में पूरा सहयोग करेगा, प्रत्येक निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित रहेगा, किसी भी गवाह को प्रभावित या प्रलोभित करने का प्रयास नहीं करेगा तथा न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया जाता है, तो अभियोजन पक्ष को जमानत निरस्त कराने के लिए विधिक कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होगी।
