✍️✍️ प्रशासन की उपेक्षा पर वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर सिंह ने जताई चिंता, बोले "शीर्ष अदालत के आदेश का तत्काल हो पालन"
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: हर सड़क पर फुटपाथ अनिवार्य, अतिक्रमण पर सख्ती के आदेश
देश की सर्वोच्च अदालत ने पैदल चलने वाले नागरिकों की सुरक्षा और उनके संवैधानिक अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐतिहासिक निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने स्पष्ट कहा कि "जहाँ भी सड़क है, वहाँ पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित फुटपाथ होना अनिवार्य है।"
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि चिह्नित फुटपाथ पर निर्बाध रूप से चलना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) तथा अनुच्छेद 21 के अंतर्गत संरक्षित है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा किसी भी आधुनिक और संवेदनशील प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
- - प्रत्येक सड़क के साथ पैदल यात्रियों के लिए अलग एवं सुरक्षित फुटपाथ उपलब्ध कराया जाए।
- - फुटपाथों पर किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए।
- - एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज को निर्देश दिया गया कि संबंधित अधिकारी बिना विलंब के इस व्यवस्था को लागू कराना सुनिश्चित करें।
- - पैदल मार्ग की सुरक्षा के लिए बड़े निर्माण की आवश्यकता नहीं है; रस्सी, बैरिकेडिंग अथवा स्पष्ट सीमांकन के माध्यम से भी सुरक्षित फुटपाथ बनाया जा सकता है।
दर्दनाक हादसे से शुरू हुई न्याय की पहल
यह मामला एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें स्कूल जाते समय एक पिता ने अपने पाँच वर्षीय बेटे को खो दिया। इस घटना के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पैदल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने संबंधी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर सिंह ने प्रशासन पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट के इस महत्वपूर्ण आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता एवं उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष श्री हरिशंकर सिंह ने सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा,
""सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला आम जनमानस की सुरक्षा और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अत्यंत सराहनीय है। सरकार और प्रशासन की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि इस ऐतिहासिक आदेश को तत्काल धरातल पर लागू किया जाए। दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिम्मेदार तंत्र अब तक अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहा है। जब तक सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का कड़ाई से पालन नहीं होगा, तब तक सड़कों पर मासूमों और आम नागरिकों की जान जोखिम में बनी रहेगी।""
जनहित में ऐतिहासिक फैसला
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस आदेश का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो देशभर में पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और नागरिकों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवागमन का अधिकार व्यवहारिक रूप से प्राप्त हो सकेगा।
