✍️✍️ Major relief for the accused in the alleged online fraud case linked to the Grindr app; anticipatory bail granted

 


✍️✍️ ग्रिंडर ऐप से जुड़ी कथित ऑनलाइन ठगी के मामले में अभियुक्त को बड़ी राहत, अग्रिम जमानत मंजूर

वाराणसी। ग्रिंडर ऐप के माध्यम से कथित ऑनलाइन ठगी और बैंक खाते से धनराशि ट्रांसफर कराने के मामले में वाराणसी के सत्र न्यायालय ने अभियुक्त हर्ष तिवारी को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। प्रभारी सत्र न्यायाधीश संध्या श्रीवास्तव ने अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्तागण अविनाश जायसवाल व शादाब अहमद ने पक्ष रखा। 

बता दे की यह मामला थाना बड़गांव, वाराणसी में दर्ज मुकदमा धारा 318(4) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार, उपनिरीक्षक सुनील कुमार यादव द्वारा दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि 13 जुलाई 2026 को मिथिलेश रघुवंशी ने सूचना दी थी कि ग्रिंडर ऐप एवं अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क होने के बाद अहिरत नहर के पास मिलने पर कुछ लोगों ने उसका मोबाइल अपने कब्जे में लेकर उसके एक्सिस बैंक खाते से 80 हजार रुपये एनईएफटी तथा 5 हजार रुपये यूपीआई के माध्यम से ट्रांसफर करा लिए।

पुलिस का दावा है कि मौके से आदर्श चौबे को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के दौरान उसने कथित रूप से अपने साथियों के साथ ग्रिंडर ऐप और अन्य एलजीबीटी ऐप के जरिए लोगों को बुलाकर उनके मोबाइल फोन से ऑनलाइन धनराशि ट्रांसफर कराने की बात स्वीकार की।

सुनवाई के दौरान हर्ष तिवारी की ओर से विद्वान अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि वह छात्र है और घटना से उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि एफआईआर में न तो उसका मोबाइल नंबर दर्ज है और न ही उसके बैंक खाते में किसी धनराशि के ट्रांसफर का कोई उल्लेख है।

दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने हर्ष तिवारी की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। आदेश के अनुसार, यदि पुलिस अभियुक्त को गिरफ्तार करती है तो उसे 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान धनराशि के दो प्रतिभू प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाएगा।

न्यायालय ने जमानत के साथ कई शर्तें भी निर्धारित की हैं। अभियुक्त को जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर पुलिस के समक्ष उपस्थित होना होगा। वह किसी भी गवाह या संबंधित व्यक्ति को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से धमकी, प्रलोभन या दबाव नहीं डालेगा। सक्षम न्यायालय की अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जाएगा तथा विचारण के दौरान प्रत्येक तिथि पर न्यायालय में उपस्थित रहेगा और गवाहों की उपस्थिति पर अनावश्यक स्थगन नहीं मांगेगा।




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