✍️✍️ रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 15 लाख की ठगी, विरोध करने पर मारपीट व जातिसूचक गाली; विशेष कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश
वाराणसी। रेलवे और स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये ठगने, फर्जी जॉइनिंग व कॉल लेटर थमाने और पैसे वापस मांगने पर मारपीट कर जातिसूचक शब्द कहने का एक गंभीर मामला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश (SC/ST एक्ट), वाराणसी (सर्वजीत कुमार सिंह) की अदालत ने प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए सारनाथ थाना प्रभारी को आरोपियों के खिलाफ तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करने का कड़ा आदेश दिया है। बता दे की पीड़ित अपने फौजदारी अधिवक्ता कौशल कुमार व सहयोगी अधिवक्ता मनोज यादव के जरिए अंतर्गत धारा 173 (4) BNSS के तहत प्रार्थना पत्र माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया था।
2018 से रची जा रही थी साजिश
विशेष न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अनुसार, परिवादी राहुल कुमार गौड़ की मुलाकात वर्ष 2018 में अभिषेक मिश्रा नाम के व्यक्ति से हुई थी। अभिषेक ने अपने ससुर भारतेंदु मिश्रा और अन्य सहयोगियों को रेलवे में बड़ा अधिकारी बताकर युवाओं को नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। आरोपी के झांसे में आकर परिवादी और अन्य लोगों ने लगभग 10 से 12 लाख रुपये नकद तथा राहुल चौधरी, अरुण चौधरी, चंदन कुमार, सुनील सिंह आदि के खातों में कुल करीब 14 से 15 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
फर्जी लेटर देकर मेडिकल के नाम पर भेजा
रुपये ऐंठने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को कूटरचित (फर्जी) जॉइनिंग लेटर, कॉल लेटर तथा अधिकारियों की फर्जी सील-मुहर लगे दस्तावेज थमा दिए। 13 सितंबर 2022 को जब पीड़ित मेडिकल परीक्षण के लिए बताए गए केंद्र पर पहुंचा, तो पता चला कि वहां ऐसा कोई सेंटर ही नहीं है। ठगी का एहसास होने पर जब संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो आरोपियों ने अपने मोबाइल बंद कर लिए।
पैसे मांगने पर की मारपीट और दी जान से मारने की धमकी
पीड़ित का आरोप है कि 20 मार्च 2026 को जब वह अपने बकाए पैसे मांगने पहुंचा, तो आरोपी अभिषेक मिश्रा, भारतेंदु मिश्रा, अरुण चौधरी, चंदन कुमार, सुनील व राहुल चौधरी ने उसके साथ अभद्रता की। आरोपियों ने भरे समाज के बीच जातिसूचक गालियां दीं, पीट-पीटकर जान से मारने का प्रयास किया और बीच-बचाव करने आए स्थानीय लोगों की मदद से परिवादी की जान बच सकी।
पुलिस आयुक्त से शिकायत के बाद भी नहीं हुई थी कार्रवाई
घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस आयुक्त वाराणसी को लिखित सूचना दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता, कूटरचित दस्तावेज, मारपीट व जातिसूचक शब्दों के प्रयोग के संज्ञेय अपराध को देखते हुए धारा 173(4) बी.एन.एस.एस. के तहत सारनाथ पुलिस को मामले की तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
