✍️✍️ कैफे विवाद, मारपीट और आगजनी के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज
मैगी बनाने को लेकर शुरू हुआ विवाद, जातिसूचक गाली देने और कार व सरकारी ट्रांसफार्मर जलाने का आरोप
वाराणसी। कैंट थाना क्षेत्र में कैफे विवाद के बाद मारपीट, तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट), वाराणसी की अदालत ने आरोपी अभिषेक सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामले में आरोपी पक्ष ने खुद को निर्दोष बताते हुए अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग की थी, जबकि अभियोजन पक्ष ने आरोपों की गंभीरता और विधिक प्रावधानों के आधार पर इसका विरोध किया। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से वादी के अधिवक्ता संजय साहनी, अखिलेश कुमार व जिला सहायक शासकीय फौजदारी अधिवक्ता सत्येंद्र सिन्हा ने पक्ष रखा व अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध किया।
मैगी बनाने को लेकर शुरू हुआ था विवाद
अभियोजन के अनुसार, वादी आदित्य सोनकर ने कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि 12/13 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि करीब 12 बजे अभिषेक रघुवंशी उर्फ पन्नू, सनी सिंह, आदित्य रघुवंशी, शशिभूषण उपाध्याय उर्फ चूंदी, अभिजीत ओझा, अंशुमान सिंह, शाश्वत पांडेय समेत कई अन्य लोग कैफे पर पहुंचे थे। आरोप है कि मैगी बनाने को लेकर हुए विवाद के बाद आरोपियों ने गाली-गलौज की। विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई और लाठी-डंडों से कैफे में तोड़फोड़ की गई।
कार और सरकारी ट्रांसफार्मर में आग लगाने का भी आरोप
प्राथमिकी के मुताबिक, 15 अगस्त 2026 की भोर करीब तीन बजे आरोपियों ने कथित रूप से दोबारा दुकान पर पहुंचकर वादी के चचेरे भाई की कार और बिजली के सरकारी ट्रांसफार्मर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इस दौरान परिवार के लोगों को भी जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। वादी पक्ष ने घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज होने की बात भी कही है।
अभियोजन ने किया अग्रिम जमानत का विरोध
अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपी निर्दोष है और घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था। वहीं, विशेष लोक अभियोजक और वादी पक्ष के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों का हवाला दिया।
अदालत ने खारिज की अर्जी
अभिलेखों और उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में एससी/एसटी अधिनियम से संबंधित गंभीर आरोपों पर विचार किया। आदेश में अधिनियम की धारा 18 तथा संबंधित न्यायिक निर्णयों का संदर्भ लेते हुए आरोपी अभिषेक सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।
