✍️✍️ Big setback for two real brothers in land dispute, anticipatory bail rejected


✍️✍️ जमीन विवाद में दो सगे भाइयों को बड़ा झटका, अग्रिम जमानत खारिज

""बालू-गिट्टी हटाने को लेकर हुआ था खूनी संघर्ष, गोली और कट्टे के बट से हमला करने का आरोप""

वाराणसी। शिवपुर थाना क्षेत्र के लोढ़ान गांव में जमीन विवाद और बालू-गिट्टी के कारोबार को लेकर हुए खूनी संघर्ष के मामले में वाराणसी न्यायालय ने दो आरोपित सगे भाइयों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-07/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट विकास श्रीवास्तव-II की अदालत ने अजीत कुमार उपाध्याय और अजय उपाध्याय, पुत्रगण स्वर्गीय गिरजाशंकर उपाध्याय, की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र को सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया। अदालत में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध वादी के अधिवक्ता आनंद कुमार पाठक, जितेंद्र सिंह व सहयोगी अधिवक्ता कृपा शंकर उपाध्याय एव चंद्रभान गिरी ने किया। मामला शिवपुर थाने में दर्ज एक मुकदमे से संबंधित है। जिसमे आरोपितों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

जमीन से बालू-गिट्टी हटाने को लेकर विवाद

अभियोजन के अनुसार वादी अतुल उपाध्याय ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि लोढ़ान स्थित उसकी जमीन पर बालू-गिट्टी का कारोबार किया जाता है। आरोप है कि 19 जुलाई 2026 को करीब 11:30 से 12 बजे के बीच कुछ लोग जमीन पर पहुंचे और बालू-गिट्टी हटाने का दबाव बनाने लगे।

विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और आरोप है कि आरोपित पक्ष की ओर से ईंट-पत्थर चलाए गए। इसी दौरान हरिओम पाण्डेय पर कट्टे के बट से हमला करने का आरोप लगाया गया, जिससे शशिफान्त के चेहरे पर गंभीर चोट आई। बीच-बचाव करने पहुंचे रविकान्त उपाध्याय को गोली मारकर घायल करने का भी आरोप है।

मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों का उल्लेख

अभियोजन की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया गया कि केस डायरी में घायल रविकान्त उपाध्याय की मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर आर्म इंजरी तथा वैस्कुलर इंजरी का उल्लेख है और उनका उपचार चल रहा है। अभियोजन ने यह भी अदालत के संज्ञान में लाया कि आरोपितों के विरुद्ध पूर्व में भी आपराधिक मामले दर्ज होने का उल्लेख केस डायरी में है। 

अपराध की गंभीरता और केस डायरी

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, केस डायरी में उपलब्ध सामग्री, आरोपों की प्रकृति और अपराध की गंभीरता का अवलोकन किया। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत परिस्थितियों में आरोपितों को अग्रिम जमानत प्रदान किए जाने का पर्याप्त आधार नहीं बनता है।इसके बाद अदालत ने अजीत कुमार उपाध्याय और अजय उपाध्याय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

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