Child custody case: Mother's petition dismissed due to lack of jurisdiction

 

✍️✍️ बच्चों की कस्टडी का मामला: क्षेत्राधिकार के अभाव में माँ की याचिका खारिज

वाराणसी। बच्चों की संरक्षता और अभिरक्षा (कस्टडी) से जुड़े एक मामले में वाराणसी के परिवार न्यायालय ने क्षेत्राधिकार को लेकर महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अपर प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय संख्या-02 की पीठासीन अधिकारी श्रद्धा त्रिपाठी ने एक वाद मे वादिनी की याचिका को सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए नियमानुसार वापस करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने माना कि बच्चों के सामान्य निवास स्थान के आधार पर मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार सुल्तानपुर के सक्षम न्यायालय को प्राप्त है। अदालत मे पति की ओर से अधिवक्ता शशिकांत यादव व सहयोगी अधिवक्तागण धनेश चंद प्रजापति एव आनंद साहनी द्वारा प्रभावी पैरवी की गई। 

दो अवयस्क बच्चों की कस्टडी की थी मांग
मामले के अनुसार, वादिनि ने अपने पति के विरुद्ध परिवार न्यायालय में याचिका दाखिल कर अपनी पुत्री, जिसकी उम्र लगभग 15 वर्ष है, तथा पुत्र , जिसकी उम्र लगभग 13 वर्ष है, की संरक्षता और अभिरक्षा दिलाने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों से छुट्टियों में मिलने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया था।
वादिनी ने वैवाहिक जीवन में प्रताड़ना और क्रूरता का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि बच्चों को वाराणसी से सुल्तानपुर ले जाया गया। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वर्ष 2023 में पारित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से संबंधित आदेश का भी हवाला दिया था।

पति की ओर से उठाया गया क्षेत्राधिकार का सवाल
विपक्षी पति की ओर से संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर याचिका की पोषणीयता और न्यायालय के क्षेत्राधिकार पर आपत्ति जताई गई।
विपक्षी पक्ष (पति) की दलील थी कि दोनों बच्चे सुल्तानपुर स्थित पैतृक आवास पर रह रहे हैं और वहीं के स्टेला मैरिस कॉन्वेंट स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसलिए उनकी संरक्षता और अभिरक्षा से संबंधित मामले की सुनवाई वाराणसी के बजाय सुल्तानपुर के सक्षम न्यायालय में होनी चाहिए।

बच्चों के सामान्य निवास स्थान को माना महत्वपूर्ण

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने बच्चों के सामान्य निवास स्थान को क्षेत्राधिकार निर्धारित करने में महत्वपूर्ण माना। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि दोनों बच्चे लंबे समय से सुल्तानपुर में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
न्यायालय ने संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम के प्रावधानों के आलोक में माना कि केवल वादिनी के वाराणसी में निवास करने से बच्चों की संरक्षता संबंधी वाद की सुनवाई का क्षेत्राधिकार वाराणसी परिवार न्यायालय को प्राप्त नहीं हो जाता।

सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश

न्यायालय ने विपक्षी पति की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए याचिका को क्षेत्राधिकार के अभाव में वाराणसी में सुनवाई योग्य नहीं माना। साथ ही, याचिका को सक्षम क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय, सुल्तानपुर, में प्रस्तुत किए जाने के लिए नियमानुसार वापस करने का आदेश दिया।

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