✍️✍️ 23 साल पुराने भ्रष्टाचार मामले में पूर्व ग्राम प्रधान बरी, अदालत ने सुनाया फैसला
वाराणसी: जौनपुर जिले के बक्शा विकास खंड अंतर्गत ग्राम सहोदरपुर में वर्ष 1989-90 के दौरान इंदिरा आवास योजना के तहत बने 6 आवासों में फर्जीवाड़े और कथित धनराशि गबन के 23 साल पुराने मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।
वाराणसी के विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अपर सत्र न्यायाधीश पूनम पाठक की अदालत ने सबूतों के अभाव में बक्शा के तत्कालीन ग्राम प्रधान तीर्थराज सिंह (निवासी ग्राम खमपुर, जौनपुर) को सभी आरोपों से दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता रमेश यादव ने पक्ष रखा।
प्रकरण के अनुसार 1995 में दर्ज हुई थी FIR, आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन वाराणसी द्वारा की गई जांच के आधार पर 22 सितंबर 1995 को थाना बक्शा में मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि ग्राम सहोदरपुर में 6 भूमिहीन लाभार्थियों के इंदिरा आवास निर्माण के दौरान रसीदों और दस्तावेजों में कूट-रचना (फर्जीवाड़ा) करके सरकारी धन का गबन किया गया था। इस मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान तीर्थराज सिंह पर भा.दं.सं. की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 व 13(2) के तहत आरोप तय किए गए थे।
विशेष न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं की बहस सुनने और पत्रावली पर मौजूद दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी तीर्थराज सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं हैं, जिसके आधार पर पूर्व ग्राम प्रधान तीर्थराज सिंह को बाइज्जत दोषमुक्त किया जाता है।
