Minor rape case, bail granted


✍️✍️नाबालिक के साथ दुष्कर्म का मामला, जमानत मंजूर

वाराणसी। चोलापुर थाना क्षेत्र में नाबालिग किशोरी से जुड़े पॉक्सो एक्ट के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन पाण्डेय की अदालत ने आरोपी विशेष राजभर की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की एक प्रतिभू प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, जमानत के दौरान आरोपी को न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्तागण श्रीकांत प्रजापति, बिजेंद्र सिंह व विनोद कुमार यादव ने पक्ष रखा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, चोलापुर थाना क्षेत्र के पीड़िता की माँ ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि दो अगस्त 2026 को उनकी 14 वर्षीय पुत्री को खुटहां निवासी विशेष राजभर, पुत्र छोटेलाल राजभर, बहला-फुसलाकर शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया था। इस मामले में चोलापुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने आवश्यक साक्ष्य संकलित कर आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिया था।

बचाव पक्ष की ओर से इस तथ्य को भी रेखांकित किया गया कि केस डायरी के अनुसार, पीड़िता की मां ने उसकी आंतरिक एवं बाह्य चिकित्सीय जांच कराने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा, घटना दो अगस्त 2026 की बताई गई, जबकि प्राथमिकी दस अगस्त 2026 को दर्ज कराई गई थी। बचाव पक्ष ने प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई देरी को भी जमानत के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार बताया।

जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से यह भी दलील दी गई कि उसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है और वह लगभग दो माह से जेल में निरुद्ध है। विवेचना पूरी होने तथा आरोपपत्र दाखिल किए जाने के तथ्य को भी अदालत के समक्ष रखा गया।

मामले के उपलब्ध तथ्यों, पीड़िता के बयानों और अन्य परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को निर्धारित बंधपत्र और प्रतिभू प्रस्तुत करने के बाद ही रिहाई का लाभ मिलेगा। जमानत के दौरान उसे विचारण में सहयोग करना होगा, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करनी होगी और पीड़िता अथवा गवाहों को डराने-धमकाने या प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना होगा। इसके अतिरिक्त, निवास स्थान में परिवर्तन होने पर संबंधित थाने और न्यायालय को सूचना देना अनिवार्य होगा।

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