Shreya Upadhyay murder case: Lover's father's bail plea rejected


✍️✍️ श्रेया उपाध्याय हत्याकांड: प्रेमी के पिता की जमानत अर्जी खारिज

""शादी से इनकार के बाद 22 वर्षीय युवती की हत्या का मामला, अदालत ने अपराध की गंभीरता और साक्ष्यों को माना अहम""

वाराणसी। राजातालाब थाना क्षेत्र के चर्चित श्रेया उपाध्याय हत्याकांड में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी के पिता राम सहाय चौबे की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्रुतगामी प्रथम) कुलदीप सिंह-II की अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, अभियोजन पक्ष के तर्कों और अपराध की गंभीरता पर विचार करने के बाद यह आदेश पारित किया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 वर्षीय श्रेया उपाध्याय की हत्या के मामले में राम सहाय चौबे पर साजिश में शामिल होने का आरोप है। अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज गुप्ता तथा वादी पक्ष के अधिवक्ता चंद्रशेखर मिश्रा ने प्रभावी पैरवी की।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, वादी की पुत्री श्रेया उपाध्याय 18 अगस्त 2026 की सुबह करीब 8:40 बजे कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश की। इसके बाद 20 अगस्त 2026 को बच्छाव पश्चिम पुरा क्षेत्र में पानी की टंकी के पास स्थित एक कमरे से उसका लहूलुहान शव बरामद हुआ। बताया गया कि यह कमरा नामजद आरोपी विवेक चौबे ने किराये पर ले रखा था।

मृतका की मां रीता देवी के बयान के अनुसार, विवेक चौबे के पिता राम सहाय चौबे उनकी बेटी से अपने बेटे की शादी कराना चाहते थे। परिजनों द्वारा इस रिश्ते से इनकार कर युवती की शादी दूसरी जगह तय किए जाने के बाद विवाद और रंजिश बढ़ने का आरोप लगाया गया। अभियोजन के मुताबिक, राम सहाय चौबे ने युवती को लेकर धमकी भी दी थी। आरोप है कि इसी रंजिश में विवेक चौबे और अन्य लोगों के साथ मिलकर वारदात की साजिश रची गई। इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी है। 

अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत के समक्ष प्रस्तुत पोस्टमार्टम संबंधी विवरण के मुताबिक, मृतका के गले पर धारदार हथियार से करीब 17 सेंटीमीटर लंबा घाव पाया गया था, जो श्वासनली तक पहुंचा था। पेट के दाहिने हिस्से में भी धारदार हथियार से चोट का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर चोटों और असामान्य स्थितियों का जिक्र है। चिकित्सकीय निष्कर्ष के अनुसार, अत्यधिक रक्तस्राव और उससे उत्पन्न शॉक के कारण युवती की मृत्यु हुई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों, साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष के तर्कों पर विचार किया। अभियोजन ने अपराध की गंभीरता और आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को जमानत न दिए जाने का आधार बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राम सहाय चौबे की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।

Post a Comment

Previous Post Next Post