✍️✍️ घर में चोरी करने का आरोप, जमानत मंजूर


वाराणसी: विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के न्यायाधीश रजत वर्मा की अदालत ने थाना सारनाथ में दर्ज ताला तोड़कर घर में घुसकर चोरी करने के एक मामले में अभियुक्त विशाल राजभर पुत्र लाल जी राजभर नि. बेनीपुर थाना सारनाथ जिला वाराणसी कि ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

""अदालत में बचाव पक्ष कि ओर से फौजदारी अधिवक्ता जुनैद जाफरी ने पक्ष रखा""

👉 बता दें कि प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार दि. 14.01.25 को वादिनी मुकदमा निवास जे.डी. नगर कालोनी फेज 2 अकथा थाना सारनाथ वाराणसी से अपने मूल निवास ग्रा. व पोस्ट धौरहरा थाना चौबेपुर जिला वाराणसी से अपने परिवार के साथ चली गई थी। उस घर में कोई नहीं था। वादिनी मुकदमा दि. 15.01.25 को आई तो मेन गेट का ताला टूटा मिला, तब वादिनी मुकदमा अंदर जाकर देखी तो सभी कमरे के लाक टूटे थे तथा उसमें रखे हुए सारे सामान बिखरे पड़े थे तथा कमरे में रखे आलमारी के भी लाक टूटे पड़े थे तथा आलमारी में रखे पैसे और गहने गायब थे। उपरोक्त के संबंध में प्राथमिकी अज्ञात में संबंधित थाने में पंजीकृत कराया गया था। विवेचना के दौरान प्रार्थी/अभियुक्त का नाम प्रकाश में आया। प्रार्थी/अभियुक्त से माल बरामद होने का भी आरोप है।

👉 अभियुक्त की ओर से अदालत में विद्वान अधिवक्ता द्वारा तर्क प्रस्तुत किया गया कि प्रार्थी/अभियुक्त को उपरोक्त अभियोग में सर्वथा मिथ्या एवं मनगढंत कथानक के आधार पर आरोपित किया गया है, वह निर्दोष है। सत्यता यह है कि प्रार्थी/अभियुक्त एक मोटरसाइकिल का सकुशल मिस्त्री है तथा आशापुर चौराहे पर प्रार्थी की मोटरसाइकिल मरम्मत की दुकान है तथा दिन प्रतिदिन थाना इलाका सारनाथ वाराणसी के दरोगा जी व फैंटम पुलिस वाले प्रार्थी की दुकान पर अपने मोटरसाइकिल की मरम्मत कराते रहते हैं। परिणाम स्वरूप दि. 12.02.25 को थाना इलाका सारनाथ के दरोगा जी द्वारा अपने मोटरसाइकिल की मरम्मत करायी थी तथा प्रार्थी द्वारा पैसा मांगने पर गाली गालौज करने लगे तब प्रार्थी ने दरोगा जी का विरोध किया तो कहा कि अगर पैसा मांगे तो फर्जी मुकदमा लगाकर जेल भेज देंगे और जिंदगी बर्बाद कर देंगे। फिर अगले दिन थाने के सिपाही द्वारा प्रार्थी की दुकान पर कहा गया कि दरोगा जी तुम्हें पैसा देने के लिए थाने पर बुला रहे हैं। प्रार्थी/अभियुक्त जब अपना पैसा लेने थाने पर गया तो दरोगा जी द्वारा प्रार्थी को गाली देते हुए लाक में बंद कर दिया गया उसी लाक में पहले दो व्यक्ति बंद थे। दरोगा जी द्वारा दो दिन तक बंद कर उसी व्यक्तियों के साथ कई मुकदमा लगाकर प्रार्थी का चालान कर जेल भेज दिया। प्रार्थी/अभियुक्त सह-अभियुक्तगण को न तो जानता पहचानता है और न ही उनसे कोई वास्ता सरोकार है।

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