याची अधिवक्ता सुनील चौधरी ने बताया कि गाँव के जिसुखराम ने संजय सिंह को वर्ष 2011 में अपनी मृतुय से पहले पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी दिया था इस आधार पर 2011 में संजय ने जमीन छत्रपाल को बेच दिया थाऔर छत्रपाल ने 2022 में चार लोगों को जमीन बेच दिया जिसमें यांची गवाह है । जबकि शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि पावर पावर ऑफ अटॉर्नी फर्जी था क्योंकि जीसूख राम की हत्या 2011 हो चुकी थी जिस पर उनके पुत्र ने मुकदमा भी दर्ज कराया था। और हत्या के बाद उनके वारिसानो पत्नी पुत्र ने शिकायतकर्ता के पछ में बैनामा कर दिया था।याची के अधिवक्ता ने बताया कि छत्रपाल वअन्य व शिकायतकर्ता दोनों ने बैनामा निरस्तीकरण का मुकदमा किया है जो विचाराधीन है ।इसके बावजूद शिकायतकर्ता की ओर से क्रिमिनल केस फ़ाइल कर याची व अन्य को सम्मन करा दिया गया।
जिस पर न्यायालय ने राज्यसरकार व शिकायकर्ता को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में जवाब मांगा है और निचली अदालत की कार्यवाही पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है ।मुकदमे को 8 सप्ताह बाद लिस्ट किये जाने का आदेश किया।
