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🔍 घटना का पूरा विवरण:
🗓️ 21 सितंबर 2019, सुबह करीब 7:30 बजे
➡️ केके उपाध्याय अपने घर के बाहर खड़े थे और उनकी पत्नी ममता उपाध्याय घर में बर्तन धो रही थीं।
➡️ उसी वक्त, मृतक के भाई राजेन्द्र उपाध्याय, उनकी पत्नी पूजा मिश्रा, पुत्र रजत उपाध्याय और रामविचार उपाध्याय हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचे।
➡️ पूजा मिश्रा ने ललकारा और रजत ने गोली चला दी। इसके बाद रामविचार ने चापड़ से कई बार वार किया।
➡️ शोर सुनकर ममता उपाध्याय बाहर आईं तो उन्हें भी बेरहमी से मार डाला गया।
➡️ प्रत्यक्षदर्शी सुमित उपाध्याय (मृतक का पुत्र) किसी तरह बच निकला और तुरंत पुलिस को सूचना दी।
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⚖️ न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्य:
👉 राजेन्द्र, पूजा व रजत उपाध्याय ने खुद कोर्ट में आत्मसमर्पण किया।
👉 इनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पिस्टल, चापड़ और कारतूस बरामद किए गए।
👉 अच्छे हसन उर्फ नजमुल हसन के घर से राजेन्द्र के खून लगे कपड़े मिले।
👉 महेंद्र प्रताप राय के घर से भी हथियार बरामद हुए।
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📜 अदालती फैसला:
✅ 6 दोष सिद्ध अभियुक्तों को सजा:
👤 नाम 🔒 सजा 💰 जुर्माना
👉 राजेन्द्र उपाध्याय (भाई) आजीवन कारावास ₹20,000 जुर्माना
👉 पूजा मिश्रा (उपाध्याय) आजीवन कारावास ₹21,000 जुर्माना
👉 रजत उपाध्याय (पुत्र) आजीवन कारावास ₹28,000 जुर्माना
👉 रामविचार उपाध्याय आजीवन कारावास ₹18,500 जुर्माना
👉 महेंद्र प्रताप राय 5 वर्ष कठोर कारावास ₹5,000 जुर्माना
👉 अच्छे लाल उर्फ नजमुल हसन 5 वर्ष कठोर कारावास ₹7,000 जुर्माना
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❌ साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त 5 अभियुक्त:
🙅 दोषमुक्त व्यक्ति ⚖️ पैरवी अधिवक्ता
👉 कृष्ण मोहन मिश्रा (पैरवी अधिवक्ता विनोद शर्मा)
👉 मदन यादव (पैरवी अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी व रमेश यादव)
👉 मनचंदा उर्फ चंदन (पैरवी अधिवक्ता ओमकार नाथ गिरी)
👉 वत्सला (पैरवी अधिवक्ता एहतेशाम आबिदी, सुरेश कुमार)
👉 कुश्मेश्वर मिश्रा (पैरवी अधिवक्ता बद्रीनाथ पांडेय)
> ⚖️ पैरवी अधिवक्ता (वादी पक्ष):
> ⚖️ अभियोजन पक्ष से:
👉 डीजीसी मुनीब सिंह चौहान
👉 एडीजीसी पवन कुमार जायसवाल
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📌 प्रमुख तथ्य:
👉 हत्या का कारण: पारिवारिक संपत्ति विवाद
👉 मुख्य गवाह: सुमित उपाध्याय (मृतक का पुत्र)
👉 अदालत में दर्ज बयान से स्पष्ट: सभी अभियुक्तों ने सुनियोजित तरीके से दोहरी हत्या को अंजाम दिया।
👉 घटना के बाद पुलिस को 100 नंबर पर कॉल कर सूचना दी गई।
👉अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दोनों की मृत्यु हो गई।
नोट: दोषमुक्त अभियुक्त के पैरवी अधिवक्ता के नाम में त्रुटि हो सकती हैं।




