👉 बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी ने कहा, “अगर सरकार एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करती है, तो हम उसका समर्थन करेंगे। हमने कई बार मुख्यमंत्री से अनुरोध किया लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसके विपरीत अधिवक्ता अमेंडमेंट बिल लाकर हमें दबाने की कोशिश की गई, जिसे अधिवक्ताओं के कड़े विरोध के कारण वापस लेना पड़ा।”
👉 वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने चेतावनी देते हुए कहा कि "यदि सरकार जल्द एक्ट लागू नहीं करती है तो अधिवक्ता वर्ग विधानसभा का घेराव करने के लिए बाध्य होगा"
👉 विरोध प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी का भी समर्थन रहा। अधिवक्ता व पूर्व प्रत्याशी किशन दीक्षित ने कहा, “अगर हमारी सरकार बनती है तो एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को अवश्य लागू किया जाएगा।” एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने भी विधानसभा में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है।
🎈 मुख्य मांगे और ज्ञापन का सारांश:
प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया एवं महामहिम राज्यपाल महोदया को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट, वाराणसी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल थीं:
👉1. एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की तत्काल अधिनियमन और कार्यान्वयन।
👉2. अधिवक्ता कल्याण निधि से युवा अधिवक्ताओं को 3 वर्षों तक ₹5000 प्रतिमाह भत्ता।
👉3. 70 वर्ष से अधिक आयु के अधिवक्ताओं को ₹15000 प्रतिमाह जीवन निर्वाह भत्ता।
✍️ ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि अधिवक्ता कल्याण निधि में 4 अरब से अधिक की राशि एकत्र हो चुकी है, जिससे उक्त लाभ बिना किसी वित्तीय कठिनाई के प्रदान किए जा सकते हैं।
🎈 प्रदर्शन में सम्मिलित प्रमुख अधिवक्तागण:
👉 श्रीनाथ त्रिपाठी (सदस्य, बार काउंसिल ऑफ इंडिया), अनुज यादव (बनारस बार पूर्व महामंत्री) ,विवेक शंकर तिवारी (पूर्व अध्यक्ष, सेंट्रल बार), मंगलेश दुबे (वर्तमान अध्यक्ष, सेंट्रल बार), कमलेश यादव (पूर्व महामंत्री, बनारस बार), शशिकांत दुबे (पूर्व महामंत्री, सेंट्रल बार), कृपा शंकर (अधिवक्ता), बृजेश मिश्रा (पूर्व महामंत्री, बनारस बार), व अन्य गणमान्य अधिवक्ता।
---
🎈भारत के किन-किन राज्यों में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू है?
👉 देश में अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए कुछ राज्यों ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को अधिनियमित किया है, हालाँकि कई अधिवक्ताओं का मानना है कि ये कानून प्रभावी क्रियान्वयन से कोसों दूर हैं।
राज्य अधिवक्ता संरक्षण कानून की स्थिति
👉 राजस्थान लागू – अधिनियमित वर्ष 2023 में, यह अधिवक्ताओं पर हमले को संज्ञेय अपराध बनाता है।
👉 मध्य प्रदेश प्रस्तावित – राज्य विधानसभा में बिल पारित हुआ, अधिसूचना की प्रतीक्षा।
👉 छत्तीसगढ़ लागू – अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम 2023 प्रभावी है।
👉 तेलंगाना आंशिक सुरक्षा नियम लागू, व्यापक एक्ट की मांग जारी है।
👉 केरल प्रस्तावित – बार काउंसिल द्वारा सरकार को ड्राफ्ट सौंपा गया।
👉 महाराष्ट्र लंबित – बार एसोसिएशनों द्वारा दबाव के बावजूद अभी तक अधिनियमित नहीं।
👉 उत्तर प्रदेश में अधिवक्ता सुरक्षा कानून अब तक अधिनियमित नहीं हो सका है, हालांकि अधिवक्ता संगठनों द्वारा वर्षों से इसकी मांग लगातार उठाई जाती रही है।




