✍️✍️ प्राइमरी अध्यापिका की करतूत: 80 वर्षीय माता-पिता को जालसाजी से घर से निकालने की कोशिश, हाई कोर्ट ने लगाई रोक
वाराणसी के शिवपुर क्षेत्र में रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। एक विधवा बेटी पर आरोप है कि उसने अपने 80 वर्षीय पिता और 75 वर्षीया माता को अंधेरे में रखकर करोड़ों की पैतृक संपत्ति धोखाधड़ी से अपने नाम करा ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय (High Court) ने बुजुर्ग दंपति को राहत देते हुए उनकी बेदखली पर अंतरिम रोक लगा दी है।
"" अदालत में पीड़ित बुज़ुर्गों की ओर से फौजदारी अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह, विवेक कुमार सिंह व शुभम सिंह ने पक्ष रखा""
साजिश का ताना-बाना: घर बुलाकर कराई रजिस्ट्री?
पीड़ित बुजुर्ग सुरेंद्र नाथ सिंह (80 वर्ष) ने अदालत को बताया कि 2021 में उनके बेटे की मृत्यु के बाद उनकी विधवा पुत्री, रुचि सिंह, अपने बेटे के साथ उनके घर रहने आई थी। आरोप है कि रुचि ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के कर्मियों के साथ साठगांठ कर, घर पर ही सादे कागजों और स्टैम्प पेपरों पर बुजुर्गों के हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान ले लिए। इस तरह 2022 में चोरी-छिपे चार अलग-अलग 'दान विलेख' (Gift Deeds) निष्पादित करा लिए गए।
बिजली बिल ने खोला राज, विरोध करने पर मिली धमकी
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब घर के बिजली बिल पर बुजुर्ग पिता के बजाय बेटी रुचि सिंह का नाम छपकर आया। जब माता-पिता ने इस पर आपत्ति जताई, तो आरोप है कि बेटी और उसके सहयोगियों ने उनके साथ मारपीट की, चाबियां छीन लीं और रिवॉल्वर दिखाकर घर से निकालने की धमकी दी। इस संबंध में थाना शिवपुर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा भी दर्ज है।
हाई कोर्ट का सख्त रुख: "बुजुर्गों को न किया जाए बेदखल"
सिविल कोर्ट द्वारा शुरुआत में स्थगन आदेश (Injunction) न मिलने पर बुजुर्ग दंपति ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। माननीय न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने मामले की सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया:
""अगली सुनवाई (23.04.2026) तक याचिकार्ताओं (बुजुर्ग माता-पिता) को विवादित संपत्ति से बेदखल नहीं किया जाएगा और न ही इस संपत्ति पर कोई तीसरा पक्ष अधिकार (Third Party Rights) सृजित किया जाएगा।""
वाराणसी सिविल कोर्ट में अनुपालन
हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद, 21 फरवरी 2026 को वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन), कोर्ट संख्या-04 ने भी आदेश जारी कर विपक्षी (रुचि सिंह) को निर्देशित किया है कि वह उच्च न्यायालय के आदेशों का अक्षरस: पालन करे।

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