✍️✍️ गुंडा एक्ट के मामले में कोर्ट ने निरस्त किया नोटिस
अपर पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी के खिलाफ जारी गुंडा एक्ट के नोटिस को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विधि व्यवस्था के अनुसार, मात्र दो आपराधिक मामलों में संलिप्तता के आधार पर किसी व्यक्ति को 'गुंडा' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
""आरोपी की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी, आशुतोष शुक्ला व राजेश त्रिवेदी ने प्रभावी पैरवी की""
क्या था पूरा मामला?
कैंट थाना क्षेत्र के भीम नगर निवासी रवि सोनकर के विरुद्ध पुलिस ने उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 की धारा 3(1) के तहत चालानी रिपोर्ट प्रेषित की थी। पुलिस ने रवि के खिलाफ दर्ज दो मुकदमों (मु०अ०सं० 1052/2019 और मु०अ०सं० 348/2024) को आधार बनाकर उसे गुंडा घोषित करने की कार्रवाई शुरू की थी, जिसके तहत अगस्त 2025 में उसे नोटिस जारी किया गया था।
हाईकोर्ट के आदेश का हवाला:
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 'गोवर्धन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का उल्लेख किया। कोर्ट ने माना कि महज दो मुकदमों के आधार पर कोई व्यक्ति अधिनियम की धारा 2(ख) के तहत 'गुंडा' की परिभाषा में नहीं आता है।
अदालत का निर्णय:
अपर पुलिस आयुक्त शिवहरि मीणा ने अपने आदेश में कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए विपक्षी के विरुद्ध गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई करना विधि सम्मत नहीं है। कोर्ट ने धारा-9 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 07 अगस्त 2025 को जारी नोटिस को निरस्त कर दिया और संबंधित थाना प्रभारी को फाइल वापस करने का निर्देश दिया।

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